राजस्थान कांग्रेस में इन दिनों बहुत कुछ हो रहा है लेकिन दिल्ली आलाकमान इस घटनाक्रम पर मूकदर्शक बनकर बैठा है। वह गहलोत और पायलट दोनों पर सख्त कार्रवाई से बच रहा है क्योंकि दोनों पर कुछ फैसला लेते है तो इसका नुकसान आने वाले चुनावों में होगा। लेकिन अब पायलट ने बगावत का ऐलान ऐसा किया है कि आलाकमान से जवाब बनता नहीं आ रहा है। पहले पायलट ने एक दिन का धरना देकर अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे और अब पेपर लीक मामले में अजमेर से जयपुर तक पैदल मार्च निकाल रहे है।
एक महीने में दूसरी बार अपनी ही सरकार के खिलाफ मैदान में उतर चुके है। उनकी जनसंघर्ष यात्रा अजमेर से जयपुर के निकली पड़ी है और मुद्दे पेपर लीक के साथ करप्शन है। पांच दिन तक 125 किलोमीटर तक पदयात्रा चलेगी।
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वसुंधरा राजे के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की जांच तो होगी नहीं क्योंकि उनकी सरकार बचाने में राजे का हाथ था। पायलट समर्थक विधायक पदयात्रा में शामिल नहीं होंगे लेकिन इसके बाद जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
