Monday, 5 October 2026
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JPNIC विवाद: योगी सरकार ने अखिलेश पर लगाए सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप, सपा प्रमुख ने किया पलटवार

संक्षेप में

लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सरकारी धन के दुरुपयोग और परियोजना को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रचने का आरोप लगाया है, जबकि अखिलेश यादव ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

मुख्य बातें

  • JPNIC की शुरुआती लागत 200 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 864 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
  • सीएम योगी ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने एक प्राइवेट सोसायटी बनाकर संपत्ति का नियंत्रण अपने परिवार के पास रखने की साजिश रची थी।
  • डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि JPNIC का मालिकाना हक सरकार के पास है और इसे केवल संचालन के लिए लीज पर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश
JPNIC विवाद: योगी सरकार ने अखिलेश पर लगाए सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप, सपा प्रमुख ने किया पलटवार

लखनऊ के जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर परियोजना के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। सरकार का दावा है कि शुरुआती लागत वाले इस प्रोजेक्ट को मनमाने तरीके से बढ़ाया गया और इसे निजी हाथों में सौंपने की साजिश रची गई। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि जेपीएनआईसी की शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 864 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया गया। इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा रहा और इसे पूरा करने में 150 से 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। सीएम योगी के मुताबिक, सपा शासनकाल के दौरान एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर होटल, जिम और क्लब जैसी इस सरकारी संपत्ति का संचालन अपने परिवार और करीबियों को सौंपने की तैयारी थी। उन्होंने कहा कि समय रहते राज्य में सरकार बदलने के बाद इस पर रोक लगी और संपत्ति का नियंत्रण वापस लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपा गया।

सोसायटी के सदस्यों और नियंत्रण पर गरमाई सियासत

विवाद के केंद्र में वह सोसायटी है जिसका गठन सपा शासनकाल के दौरान किया गया था। प्रशासनिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस सोसायटी के नियम इस तरह तैयार किए गए थे कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी इसका नियंत्रण यादव परिवार और उनके सहयोगियों के पास ही रहे।

सोसायटी के शुरुआती सदस्यों में अखिलेश यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, पार्टी नेता राजेंद्र चौधरी, तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सचिव गजेंद्र सिंह, अंजू नारायण, वसीम हसन, वासिफ हसन और अनुपमा प्रकाश के नाम शामिल थे। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था के जरिए सार्वजनिक संपत्ति का निजी उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया था।

अखिलेश यादव का तीखा पलटवार

सरकार के इन आरोपों पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा राज में भ्रष्टाचार का स्वर्ण ठोसीकरण किया जा रहा है और जनता के सामने इसकी सच्चाई जल्द बेनकाब होगी।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि धर्म और विकास के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है और समय आने पर इनकी कारगुजारियां सामने आ जाएंगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अपने फैसलों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का विस्तृत बयान

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में मोर्चा संभालते हुए आंकड़े सामने रखे। उन्होंने कहा कि जेपीएनआईसी का निर्माण 2003 से 2007 के बीच सपा सरकार के समय शुरू हुआ और 2013 में इस प्रोजेक्ट के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

बकौल ब्रजेश पाठक, "200 करोड़ रुपये से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 850 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, लेकिन धरातल पर काम सिर्फ 60 प्रतिशत ही हुआ। जनता को यह जानना चाहिए कि यह पैसा कहां गया और कौन लोग अपनी जेबें भर रहे थे।"

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार ने इस परियोजना को किसी को बेचा नहीं है, बल्कि इसे कार्यात्मक बनाने के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के जरिए पट्टे (लीज) पर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका मालिकाना हक आज भी राज्य सरकार और एलडीए के पास सुरक्षित है, और इसे जनता के उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

JPNIC परियोजना क्या है और यह कहां स्थित है?

जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसमें कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, स्पोर्ट्स फैसिलिटी और म्यूजियम शामिल हैं।

योगी सरकार ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए हैं?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया है कि सपा सरकार ने जेपीएनआईसी की लागत 200 करोड़ से बढ़ाकर 864 करोड़ रुपये कर दी और इस सरकारी संपत्ति का नियंत्रण एक प्राइवेट लिमिटेड सोसायटी के जरिए अपने परिवार के सदस्यों के हाथ में सौंपने की साजिश रची थी।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने क्या प्रतिक्रिया दी है?

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा कि सरकार जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रही है।

वर्तमान में JPNIC का स्वामित्व किसके पास है?

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के अनुसार, JPNIC का मालिकाना हक राज्य सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के पास ही है। इसे केवल संचालन के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के तहत लीज पर दिया गया है, बेचा नहीं गया है।