Sunday, 4 October 2026
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निकाय चुनाव में पोस्टर-बैनर नहीं हटाना पड़ेगा भारी: प्रचार खर्च में जुड़ेगा हर्जाना, 38 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में

संक्षेप में

राजस्थान निकाय चुनाव में सार्वजनिक स्थलों से अवैध पोस्टर और बैनर न हटाने पर आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रचार सामग्री हटाने का खर्च प्रत्याशियों के कुल चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा और सीमा पार होने पर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य बातें

  • प्रदेश भर में 1 सितंबर तक सवा लाख से ज्यादा बैनर-पोस्टर हटाए जा चुके हैं।
  • प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में कुल 38,891 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।
  • स्क्रूटनी के दौरान तकनीकी खामियों के चलते 17,137 नामांकन पत्र खारिज हुए।
  • राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के तहत सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
जयपुर संभाग
निकाय चुनाव में पोस्टर-बैनर नहीं हटाना पड़ेगा भारी: प्रचार खर्च में जुड़ेगा हर्जाना, 38 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में

सार्वजनिक स्थलों और सरकारी भवनों पर अवैध रूप से लगाए गए पोस्टर और बैनर अब प्रत्याशियों के चुनावी खर्च का हिस्सा बनेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदर्श आचार संहिता और राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 का उल्लंघन करने पर खर्च सीमा पार होने पर उम्मीदवारों को आगामी चुनावों के लिए अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।

प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में हो रहे इन चुनावों के लिए अब कुल 38,891 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। स्क्रूटनी के दौरान तकनीकी खामियों के कारण 17,137 नामांकन पत्र खारिज किए गए थे, जबकि 10,112 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके अलावा अब तक 77 पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं।

1 सितंबर तक सवा लाख से ज्यादा होर्डिंग हटाए

राज्य में 19 अगस्त को चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई थी। इसके बाद से ही अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। बार-बार निर्देशों के बावजूद कई प्रत्याशी सड़कों, गलियों, चौराहों और सरकारी दीवारों पर प्रचार सामग्री लगा रहे हैं। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 1 सितंबर तक सवा लाख से अधिक अवैध बैनर और पोस्टर हटाए जा चुके हैं।

बिजली के खंभों, सरकारी दीवारों और चौराहों पर किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का प्रचार करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। बिना संपत्ति मालिक की लिखित अनुमति के निजी मकानों पर पोस्टर चिपकाना या झंडा लगाना भी आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और व्यय पर्यवेक्षकों को निर्देश दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर सख्त चेतावनी दी जाए।

क्या है कानूनी प्रावधान?

कानूनी जानकारों के मुताबिक, राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के तहत सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को बिना अनुमति विरूपित करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि इस कानून के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना और एक महीने तक की जेल हो सकती है। गलती दोहराने पर जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपए तक किया जा सकता है।

इस बार बढ़ी चुनावी खर्च की सीमा

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार निकाय चुनाव के लिए चुनावी खर्च की सीमा में संशोधन किया है। नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्रों के प्रत्याशी अब पिछले चुनावों की तुलना में एक-एक लाख रुपए अधिक खर्च कर सकेंगे, जबकि नगरपालिका के उम्मीदवारों के लिए खर्च सीमा 50,000 रुपए तक बढ़ाई गई है। आयोग का यह कदम चुनाव में धनबल के प्रभाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

निकाय चुनाव में अवैध पोस्टर और बैनर लगाने पर क्या कार्रवाई होगी?

सार्वजनिक स्थलों और सरकारी भवनों से अवैध पोस्टर-बैनर न हटाने पर आयोग इनका खर्च प्रत्याशी के कुल चुनावी खर्च में जोड़ेगा। खर्च सीमा पार होने पर उम्मीदवार को अगले चुनाव के लिए बैन किया जा सकता है।

राजस्थान निकाय चुनाव 2024 में कितने उम्मीदवार मैदान में हैं?

प्रदेश के 41 जिलों के 10,245 वार्डों में अब कुल 38,891 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जबकि 77 पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं।

संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत क्या सजा का प्रावधान है?

राजस्थान संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 2006 की धारा 3 के तहत पहली बार उल्लंघन पर 5,000 रुपए तक का जुर्माना और एक माह की जेल हो सकती है।

कितने नामांकन पत्र खारिज किए गए थे?

स्क्रूटनी के दौरान तकनीकी खामियों के चलते कुल 17,137 नामांकन पत्र खारिज किए गए थे, और 10,112 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए।