अगर नये मंत्रिमंडल की बात करें तो कई मौजुदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है और कई नये चेहरों के साथ पायलट कैम्प के पूर्व मंत्रियों को फिर से मौका दिया जा सकता है। हाल ही में राजस्थान सरकार के कई मंत्रियों को दूसरे राज्यों में प्रभारी बनाया गया है तो इस बात को ध्यान में रखते हुए भी एक समय में एक पद की नीति के तहत भी मंत्रियों को हटाया जा सकता है। अगर पायलट कैम्प की बात करें कम से कम 4 विधायको को मंत्री बनाया जा सकता है और साथ में बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
दिल्ली आलाकमान इस बात को जानता है कि पिछली बार पायटल की बगावत को बड़ी मुश्किल से शांत किया था और इस मामले प्रियंका गांधी ने बहुत ज्यादा अहम रोल निभाया था। अगर कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में भी मध्यप्रदेश या पंजाब की तरह चुक जाता है तो उसको बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजस्थान में कांग्रेस पायलट—गहलोत दोनो को पार्टी में बने रहने के लिए बड़ी जिम्मेदारी के साथ ऐसा रास्ता निकालना होगी कि दोनों एक साथ आकर एक बार फिर कांग्रेस की सरकार बनाने में योगदान दे। कांग्रेस की गुटबाजी को विपक्ष को हमल करने का मौका मिल रहा है।
कांग्रेस के विधायक और कई बड़े नेता लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों की मांग उठाते रहे हैं और इसी बात को ध्यान में रखते दिल्ली आलाकमान ने इसकी जिम्मेदारी अजय माकन को दे रखी है। अजय माकन आये दिन राजस्थान का दौरा करते है और इसी वजह से मंत्रिमंडल में फेरबदल की खबरों का गति मिल रही है।
