Monday, 5 October 2026
अभी का दौर

जयपुर नगर निगम चुनाव: टिकट बंटवारे में संगठन की प्रक्रिया दरकिनार; विधायकों के दखल से वार्ड 76 में दो प्रत्याशी उतरे आमने-सामने

संक्षेप में

जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा के टिकट वितरण में संगठन की तय प्रक्रिया के बजाय स्थानीय विधायकों की पसंद हावी रही। मालवीय नगर के वार्ड 76 में एक ही वार्ड से दो उम्मीदवारों को पार्टी का सिंबल मिलने से अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई।

मुख्य बातें

  • जयपुर के 150 वार्डों के लिए शहर संगठन ने तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया था।
  • मालवीय नगर के वार्ड 76 में पुनीत कर्णावट और कुलदीप मिश्रा दोनों को भाजपा का सिंबल मिल गया था।
  • पूर्व महापौर कुसुम यादव का इस बार पार्षद का टिकट काट दिया गया है।
जयपुर संभाग
जयपुर नगर निगम चुनाव: टिकट बंटवारे में संगठन की प्रक्रिया दरकिनार; विधायकों के दखल से वार्ड 76 में दो प्रत्याशी उतरे आमने-सामने

जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए भाजपा के टिकट वितरण में पार्टी की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। हर वार्ड से तीन नामों का पैनल तैयार करने और प्रदेश स्तर पर स्क्रीनिंग की प्रक्रिया के बावजूद, आखिरी दौर में कई सीटों पर स्थानीय विधायकों की पसंद हावी रही। इससे कई जगह संगठन की ओर से तैयार किए गए विकल्प ही खत्म हो गए।

मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 76 में यह विवाद सबसे तीखा रहा। भाजपा की घोषित सूची में पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट का नाम आया था, लेकिन स्थानीय विधायक कालीचरण सराफ के समर्थन से कुलदीप मिश्रा को भी पार्टी का सिंबल मिल गया। इसके बाद एक ही वार्ड से दो उम्मीदवार भाजपा के सिंबल पर मैदान में आ गए। मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचने के बाद स्थिति स्पष्ट हुई और पुनीत कर्णावट के नाम से दोबारा सिंबल जारी किया गया।

विधायकों की पसंद और पैनल की प्रक्रिया में टकराव

शुरुआत में जयपुर के 150 वार्डों के लिए शहर संगठन ने वार्डवार तीन-तीन नामों के पैनल तैयार किए थे। इन नामों पर प्रदेश स्तर पर मंथन भी हुआ था। हालांकि, अंतिम सूची जारी होने पर कई विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों का दखल मुख्य वजह बन गया।

सूत्रों के मुताबिक, कई विधायक सिंगल नाम लेकर पहुंचे और अपनी पसंद के उम्मीदवार को टिकट दिलाने पर अड़ गए। मालवीय नगर के अलावा डिप्टी सीएम दिया कुमारी और विधायक कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के विधानसभा क्षेत्रों में भी टिकटों को लेकर ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। सिविल लाइंस विधानसभा सीट पर भी विधायक गोपाल शर्मा और पार्टी नेताओं के बीच कुछ वार्डों के टिकट को लेकर सहमति नहीं बन पाई, जिससे आखिरी समय तक असमंजस की स्थिति बनी रही।

कई दिग्गजों के टिकट कटे, नए चेहरों को मौका

इस फेरबदल में कई जाने-पहचे चेहरे बाहर भी हुए हैं। जयपुर की पूर्व महापौर कुसुम यादव का टिकट इस बार काट दिया गया और उनकी जगह संगठन से जुड़े सुनील कोठारी को मैदान में उतारा गया। पार्टी ने कई वार्डों में नए चेहरों को तरजीह दी है।

हालांकि, टिकट बंटवारे की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब भाजपा के सामने बगावत रोकने और नाराज दावेदारों को साधने की बड़ी चुनौती है। जिन कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारी के लिए महीनों मेहनत की थी, उनके समर्थकों में उपेक्षा का भाव है। अब संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना पार्टी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।