कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद राजस्थान में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां हो सकती है। ज्योतिराज सिंधिया व सचिन पायलट की जोड़ी अब अलग हो चुकी है तो यूपी में पायलट ही प्रियंका के साथ नजर आएंगे। अगर यूपी चुनावों से पहले राजस्थान में पायलट गुट को राजी नहीं किया गया तो इसका परिणाम यूपी चुनावों पर भी पड़ सकता है। प्रियंका गांधी भी इस बात को जानती है कि सचिन पायलट को जल्द से जल्द उचित सम्मान देकर संगठन में उन्हें सक्रिय किया जाए जिसका फायदा यूपी चुनावों में मिलेगा।
प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं लेकिन वह पायलट के कारण राजस्थान की राजनीति में ज्यादा सक्रियता दिखा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उनको पिछला रिकॉर्ड सुधारने के साथ पार्टी को फिर से जिंदा करना है। यूपी में कांग्रेस इस बार अपने दम पर चुनावी मैदान है और उसे पता है कि अगर उनकी पार्टी में एकता नहीं होगी तो वह आने वाले सभी राज्यों के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी। पश्चिम यूपी के इलाके में पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिम्मेदारी दी जाती है लेकिन वह पार्टी छोड़ चुके है और इस कारण उस इलाके में सचिन पायलट को सक्रिय किया जा रहा है। पिछले एक महीने में सचिन पायलट उत्तर प्रदेश के चार दौरे कर चुके हैं जो इस बात की और संकेत कर रहे हैं कि वह यूपी चुनावों में अहम रोल निभाते नजर आ सकते हैं।
