Monday, 5 October 2026
अभी का दौर

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दाव, जोशी खत्म करेंगे गुटबाजी तो क्या पूनिया को मिलेगी प्रतिपक्ष की कमान?

चुनाव 2023
राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दाव, जोशी खत्म करेंगे गुटबाजी तो क्या पूनिया को मिलेगी प्रतिपक्ष की कमान?

राजस्थान विधानसभा चुनावों में अभी 8 महीने का समय बचा है लेकिन बीजेपी ने प्रदेशाध्यक्ष को बदल कर ऐसा दाव खेला है जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था। बीजेपी सत्ता में वापसी के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है और दिल्ली हाईकमान इस बार प्रदेश की गुटबाजी को खत्म करने के लिए जोशी को जिम्मेदारी दी है। लेकिन इस फैसला का कितना असर होगा यह तो आने वाले समय में पता चलेगा। बीजेपी चुनावों से पहले ऐसे प्रयोग करता रहता है लेकिन राजस्थान में यह कितना कारगार साबित होगा यह तो भविष्य कस गर्भ में छिपा हुआ है।

सतीश पूनिया की जगह चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी को बीजेपी का नया प्रदेशाध्यक्ष बनाने के प्रदेश की सियासत में जबरदस्त भुचाल आया है। पूनिया तीन साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे। लेकिन अचानक से एक साथ 4 राज्यों की प्रदेशाध्यक्ष बदले गए है और इन राज्यों में चुनाव है। राजस्थान में अध्यक्ष बदलने के कई कारण बताए जा रहे है जिसमें से सबसे बड़ा कारण नेता प्रतिपक्ष को लेकर है। कटारिया के राज्यपाल बनने के बाद से यह पद खाली है और इस पद पर सतीश पुनिया को जिम्मेदारी देने की बात कही जा रही है।

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सांसद सीपी जोशी का करियर
एबीवीपी से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले चंद्र प्रकाश जोशी ने कई पदों पर कार्य किया है। सतीश पूनिया की तरह जोशी भी RSS बैकग्राउंड से ही आते हैं। जोशी चित्तौड़गढ़ से दो बार लोकसभा चुनाव जीते है। जोशी भाजपा के यूथ विंग, भाजयुमो के प्रदेश प्रेसिडेंट रह चुके हैं। इससे पहले अशोक परनामी की जगह चुनावी साल में मदन लाल सैनी को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर चौकाया था। बीजेपी ने हर बार नए चेहरों को मौका देने का नया ट्रेंड बना दिया है।

जोशी खत्म करेंगे गुटबाजी
प्रदेश में बीजेपी के नेताओं की गुटबाजी किसी से छूपी हुई नहीं है और चुनावों से पहले इसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने यह फैसला लिया है। गुटबाजी का नुकसान चुनावों में उठना पड़ता है और बीजेपी ऐसा जोखिम नहीं उठाना चाहती। राजे और पूनिया की गुटबाजी कई मौकों पर देखी गई है और इसका फायदा कांग्रेस भी उठा रही थी। लेकिन अब जोशी के नेतृत्व में सभी कार्यकता एक होकर चुनावी मैदन में उतरेंगे। लेकिन सीएम फेस को लेकर अभी तक कोई ऐलान नहीं हुआ है।

जाट—ब्राह्मण और राजपूत वोटरों पर नजर
बीजेपी का वोट बैंक राजपूत और ब्राह्मण को माना जाता है लेकिन पिछले चुनावों में बीजेपी को दोनों समाज का विरोध झेलना पड़ा था। लेकिन इस बार वह जाट—ब्राह्मण और राजपूत के सहारे सत्ता हासलि करने में लगी हुई है। जाट चेहरे को नेता प्रतिपक्ष का पद तो ब्राह्मण चहरे को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया है वहीं राजपूत नेता राजेन्द्र राठौड़ को उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी है।

मेवाड़ को साधने की कोशिश
उदयपुर से विधायक रहे गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद मेवाड़ में बीजेपी के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं था। ऐसे में जोशी को नई जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने मेवाड को साधने की कोशिश की है। मेवाड़ में उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा जिलों में ब्राह्मण और वैश्य वर्ग का दबदबा है। इस बात को बीजेपी अच्छी तरह जानती है।

नेता प्रतिपक्ष
उदयपुर से विधायक रहे गुलाबचंद कटारिया को असम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष का पद खाली था। इसको लेकर बीजेपी ने एक साथ दो निशाने साधे है और पूनिया को प्रतिपक्ष नेता की जिम्मेदारी भी दे सकती है। क्योंकि जाट नेता के रूप में पूनिया बड़ा चेहरा है।