राजनीति के जानकारों की माने तो वसुंधरा राजे की धार्मिक यात्रा से वह अपना शक्ति प्रदर्शन करेगी और इसका असर राजस्थान के साथ दिल्ली तक जाएगा। इस यात्रा को लेकर वसुंधरा गुट बड़े शक्ति प्रदर्शन का रूप देने में जुट गया है। पिछले दिनों उपचुनावों में मिली हार के बाद कई नेताओं ने वसुंधरा राजे को कमान सौपने की बात कह चुके हैं। इस हार के बाद दिल्ली में भी चर्चा हुई थी और कुछ नेता तो साफ तौर पर वसुंधरा राजे को ही अपना नेता स्वीकार करते हैं।
वसंधुरा राजे 4 दिनों तक 5 जिलों की धार्मिक यात्रा करेगी और इसकी शुरूआत 23 नवम्बर को सांवरिया सेठ के दर्शन से होगी जो 26 नवंबर को अजमेर ज़िले में ब्रह्माजी के दर्शन के साथ खत्म होगी। इस यात्रा के दौरान राजे बांसवाड़ा ज़िले में त्रिपुरा सुंदरी, उदयपुर में एकलिंगनाथ जी और राजसमंद में श्रीनाथ जी मंदिर के दर्शन करेगी। इस यात्रा को लेकर प्रदेश अध्यक्ष के साथ तमाम पदाधिकारी खामोश है।
वसुंधरा राजे ने पहले भी चुनावी यात्रा निकाली थी लेकिन पहली बार कोई नेता, पार्टी से अलग होकर अपनी यात्रा निकाल रहा है। राजे गुट के समर्थक मंत्री यूनुस ख़ान, राजपाल सिंह और कालीचरण सर्राफ़ जैसे कई बड़े नेता इस यात्रा को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है।
