पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव की घोषणा हो चुकी है और 8 जुलाई को चुनाव होने हैं, वहीं 15 जून तक नामांकन करने की आखिरी तारीख है,लेकिन चुनाव से पहले ही बंगाल से हिंसा की खबरें आनी शुरू हो गई है जिसको लेकर जमकर राजनीति हो रही है। मतदान केंद्रों के बाहर देसी बम फेंके गए कोलकाता के सियालदह और खन्ना इलाकों में बम फेंके जाने की 2 घटनाएं हुईं और स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस दलों को घटनास्थल पर भेजा गया, पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दूसरे दिन भी हिंसा जारी रही तथा विपक्षी दलों- बीजेपी, कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और ‘गुंडों' ने उनके उम्मीदवारों को नामांकनपत्र दाखिल करने से रोका है।
टीएमसी कार्यकर्ता लिटन हक कूचबिहार जिले के दिनहाटा इलाके में एक झड़प में गंभीर रूप से घायल हो गए उसके परिवार ने आरोप लगाया कि उसे प्रतिदंद्वी गुट के सदस्यों ने गोली मारी जबकि पुलिस का दावा है कि संपत्ति विवाद को लेकर हुये झड़प के दौरान उसे पीटा गया,उसे गोली नहीं मारी गयी वहीं पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से पहले राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव फिर तेज हो गया है। दरअसल पंचायत चुनाव से पहले हिंसा की खबरें आईं इसके चलते राज्यपाल ने बंगाल चुनाव आयुक्त को राजभवन तलब किया और हिंसा पर लगाम लगाने की बात कही राज्यपाल ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.उधर टीएमसी के कद्दावर नेता कुणाल घोष ने राज्यपाल को ‘बीजेपी का एजेंट' करार दिया है।
Rajasthan Politics: प्रदर्शन में नहीं पहुंचे Satish Poonia,Vasundhara Raje!
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को मारपीट से बचने की सलाह दी है.हालांकि इसी दौरान उन्होंने राज्यपाल की चुनावी हिंसा रोकने में दिलचस्पी देख कर तंज भी कसा, वे तो बीजेपी के राजदूत हैं और इसके साथ ही आपको बता दे की ममता सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव की वजह दरअसल पुरानी है।राज्यपाल ने चांसलर नियुक्ति पर राज्य सरकार के अध्यादेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया है वे खुद विश्वविद्यालयों के वीसी के ट्रांसफर और पोस्टिंग कर रहे हैं, इससे राज्य सरकार खफा है उसे लगता है कि कैबिनेट और विधानसभा से पारित अध्यादेश के प्रस्ताव से इतर गवर्नर का निर्णय राज्य सरकार के कार्य क्षेत्र में दखल है।
