33 साल पहले विधवा हुई महिला अचानक हो गई सुहागन, मरा हुआ पति फिर लौटा.. देखें पूरा चमत्कार
बानसूर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है 33 साल पहले गायब हुए शख्स की घर वापसी पर परिजन हुए हक्के बक्के रह गए। मृत समझकर परिजनों ने छोड़ी थी आस 2022 में बनवाया मृत्यु प्रमाण पत्र एक सुहागिन महिला ने वेवा की जिंदगी 33 साल बिताने के पश्चात पति जीवित लोटा
जीवित लौटने पर परिजनों में खुशी का माहौल 1989 में घर से दिल्ली खारी बावली में काम करते समय अचानक से गायब हो जाने पर परिजनों ने काफी तलाश किया लेकिन करीबन 33 साल बीत जाने पर हनुमान सैनी जीवित घर पर लौटने पर परिजनों में खुशी का माहौल है। हनुमान सैनी के 5 संतान है जिसमें तीन लड़की दो लड़के हैं सभी शादी शुदा है
बहन बेटियां हाल-चाल जानने के लिए घर पहुंची है। अपने बच्चों को छोटी सी उम्र में ही छोड़कर चले जाने के पश्चात 30 मई को अपने घर पहुंचे जहां परिजनों में खुशी का माहौल है। बड़ी संख्या में लोग सैनी का हालचाल पूछने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।75 वर्षीय हनुमान सैनी ने बताया कांगड़ा माता ने मुझे बुलाया था बता दे हनुमान सैनी 1989 में दिल्ली के खारी बावली की एक दुकान पर काम करते समय अचानक से हिमाचल के कांगड़ा माता मंदिर पहुंच गए और करीबन 33 साल तक माता के मंदिर में अपनी आराधना तपस्या की और 33 साल बीत जाने के बाद माता के आदेश पर घर वापसी की ।
हनुमान सैनी दिल्ली से खैरथल ट्रेन से 29 मई को रात्रि को खैरथल पहुंचे जहां बानसूर का कोई साधन नहीं मिलने पर रात्रि को पैदल चलकर ततारपुर चौराहा तक पहुंचा उसके पश्चात सुबह किसी साधन से बानसूर के स्वास्तिया हनुमान मंदिर तक पहुंचे मंदिर में धोक लगाकर उसके पश्चात अपने घर का रास्ता बदल जाने पर किसी दूसरे की सहायता ली जिसमें दूसरा व्यक्ति उसे पहचान गया जिसको उसके घर ले जाकर परिजनों के बीच छोड़ा । परिजनों ने हनुमान सैनी को देखकर अचंभित हो गए और घर में खुशी का माहौल हो गया ।
हनुमान सैनी की बहन तथा बेटियों को इस बारे में पता चला तो ससुराल से आकर उन्होंने भी अपने पिता व भाई का हालचाल जाना और पूछा आप इतने दिनों तक कहां थे। हनुमान सैनी की रिश्तेदारीयो में जैसे ही पता चला की हनुमान घर वापस आ गया उसके पश्चात रिश्तेदारों का घर पर आने-जाने का सिलसिला जारी है।
हनुमान सैनी के बड़े बेटे रामचंद्र सैनी बताया की 33 साल अपने पिता की याद में गुजर जाने के पश्चात पिता की जिंदा होनी की आस छोड़ चुके थे हमने आखिरकार न्यायालय का सहारा लेकर मेरे पिताजी का मृत्यु प्रमाण पत्र 2022 में बनवाया था। क्योंकि जमीन संबंधित समस्याओं से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था जिसके कारण 2022 में पिताजी का कोर्ट के जरिए मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया गया था। हम लोग पिताजी के जीवित होने की आस छोड़ चुके थे लेकिन पिताजी घर आने पर हमें बहुत खुशी हुई है।भगवान का शुक्र अदा करते हैं की हम छोटे-छोटे थे और हमने अपने पिता की सूरत तक नहीं देखी थी आज हमें वह पूरी खुशी मिल गई और हमारे पिता परिवार के बीच पहुंचा है
हनुमान सैनी ने बताया कि दिल्ली से मैं एक ट्रेन में बैठकर हिमाचल की ओर जा रहा था तब मैं पठानकोट उतरना था लेकिन मैं उस वक्त ट्रेन के फर्स्ट क्लास के डिब्बे में बैठा हुआ था और मेरी जेब में मात्र ₹20 थे और मेरे पास टीटी आया मुझे किराए के लिए कहा गया तो मेरे पास ₹20 थे रूपए कम होने पर टीटी ने मना कर दिया किराए ज्यादा होने पर लेकिन उस वक्त ट्रेन के टीटी ने मुझे पूरा टिकट अपनी जेब के पैसे से बना कर दिया और मैं पठानकोट उतर कर हिमाचल के कांगड़ा माता मंदिर पहुंच गया जहां मैंने माता की सेवा तथा पूजा में 33 साल बिता दिए 33 साल के बीच में मैं एक बार गंगासागर गया और कोलकाता वाली काली मैया के मंदिर में भी मैं धोक लगाने पहुंचा था लेकिन मुझे मेरी तपस्या तथा मेरी पूजा अर्चना पूरी होने के पश्चात कांगड़ा माता ने मुझे घर भेजने का आदेश देने पर मैं वहां से मेरे घर और मेरे परिवार के बीच आ गया





