Monday, 5 October 2026
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Birthday Special: अर्श से फर्श पर कैसे पहुंच गए Vinod Kambli, जानें पूरी कहानी

खेल जगत
Birthday Special: अर्श से फर्श पर कैसे पहुंच गए Vinod Kambli, जानें पूरी कहानी

भारत में क्रिकेट को सिर्फ एक खेल ही नहीं बल्कि एक धार्मिक आस्था की तरह पूजा जाता है. क्रिकेट भारत के हर व्यक्ति के ह्रदय में बसने वाला खेल है, जो उनके दिलों दिमाग में छाया रहता है, आज हम आपकों एक ऐसे भारतीय खिलाड़ी के बारे में बताने जा रहे है जिसने अपनी लगन और मेहनत से वो मुकाम हासिल किया जिसतक हर किसी का पहुंचना मुमकिन नहीं होता लेकिन किश्मत को शायद कुछ और मंजूर था ये मुकाम वो लंबे समय तक बनाकर नहीं ऱख पाये..इतना सब बताने के बाद आप समझ तो गए ही होगे हम बात कर रहे है..अपने समय के उस धाकड़ खिलाड़ी की जिसने खेल से धाक तो जमाई ही लेकिन उसे बरकरार नहीं ऱख पाया।

कांबली के बारे में कहा जाता है कि अचानक मिली सफलता से उन्हें जो स्टारडम मिला उसे और संभाल नहीं पाये और अपनी खराब आदतों और बुरे व्यवहार के कारण स्थिति बिगड़ती ही रही यहीं वजह है कि प्रतिभा का धनी यह क्रिकेटर अर्श से फर्श तक पहुंच गया। विनोद कांबली आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे है, हम उस शख्सियत को अपनी टीम की तरह से हार्दिक शुभकामनाएं बधाई देते है। विनोद कांबली का कैरियर इतनी जल्दी कैसे खत्म हो गया..ये प्रश्न रह-रहकर क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में जरूर आता है..तो आज हम आपको बतां रहे है विनोद कांबली के क्रिकेट और निजी जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बाते....

अर्श से फर्श पर कैसे पहुंच गए Vinod Kambli, Birthday Special ,देखें Video

किक्रेट में वैसे तो कई रिकॉर्ड है लेकिन एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे  दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली आज तक नहीं तोड़ पाए वो था विनोद कांबली के सबसे तेज एक हजार रन बनाने का रिकॉर्ड जो आज भी विश्व रिकॉर्ड बना हुआ है।

विनोद कांबली का जन्म!

विनोद कांबली का जन्म 18 जनवरी 1972 को कंजुरमार्ग स्थित इंदिरा नगर में हुआ था। कांबली के पिता पेशे से एक मेकैनिक थे और बड़ी मुश्किल से परिवार के 7 लोगों का पालन-पोषण करते थे। बहुत कम लोग ये जानते है कि कांबली के पिता तेज गेंदबाज के तौर पर मुंबई क्लब सर्किट से क्रिकेट खेलते थे।

कांबली और सचिन ने क्रिकेट में एक साथ किया था डेब्यू

विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर बचपन के दोस्त है, दोनों ने उस समय की मशहूर कांगा लीग से डेब्यू किया था, इन दोनों मे स्कूल के समय ही एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था इस रिकॉर्ड की बदोलत ही इनकी क्रिकेट में एंट्री के रास्ते खुले ये कहा जाये तो कोई गलत नहीं है, शारदाश्रम स्कूल की तरफ से खेलते हुए 664 रनों की साझेदारी निभाई थी यही नही कांबली ने नॉटआउट 349 रन बनाए थे। रणजी में 1988 में तेंदुलकर को मौका मिला तो कांबली को 1989 में।     

इत्तेफाक से हुआ सीनियर क्रिकेट क्लब में सेलेक्शन

कांबली शिवाजी पार्क में अपने दोस्त सचिन तेंदुलकर का मैच देखने गए थे, सचिन उस समय कांगा लीग की एफ डिविजन टीम से खेल रहे थे। इत्तेफाक से उस टीम को अपनी प्लेयिंग इलेवन के लिए 11वां खिलाड़ी नहीं मिल रहा था। कोच ने कांबली के बारे में सुना हुआ था और उनकी बैटिंग को देख उन्हें एकादश में शामिल कर लिया गया।


डेब्यू मैच में कांबली ने बनाए 80 रन

पहले ही मैच में कांबली ने गेंदबाजों की खूब पिटाई करते हुए ताबड़तोड़ 80 रन ठोके। कांबली ने उसी क्लब के गेंदबाजों की पिटाई की जिन्होंने उन्हें क्लब में लेने से मना कर दिया था, इसके बाद जल्द ही उन्हें रणजी में खेलने का मौका मिला।

7 में से 4 मैचों में जड़े शतक

रणजी में एट्री के बाद भी उन्हें करीब 3 साल बाद टीम इंडिया में खेलने का मौका मिला, पहले 7 मैचो में उन्होने 4 शतक लगाकर सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। यहीं नहीं कांबली ने 18 नवंबर 1994 को एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो पिछले 27 सालों से बरकरार है, उन्होने महज 14 पारियों में एक हजार रन पूरे किये।

ज्यादा समय नही चला स्टारडम

महज 17 टेस्ट मैच खेलने के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया, उस समय उनका औसत 54 का था, जिसके बाद वो कभी टीम में वापस नहीं लौट पाये, न्यूजीलैंड के खिलाफ 8 नंवबर 1995 को उन्होने कटक में आखिरी टेस्ट मैच खेला था।

विनोद कांबली की मैरिड लाइफ

बात करें कांबली की मैरिड लाइफ की तो उनकी निजी जिंदगी भी क्रिकेट की तरह ज्यादा सफल नहीं रही, पहली शादी उन्होंने एक क्रिश्चियन लड़की से थी जो ज्यादा दिन नहीं चल पाई, उनके बाद कांबली फिल्मी दुनियां की तरफ आकर्षित हुए और उन्होने मॉडल एंड्रिया हेविट से शादी की और साल 2010 में हेविट ने एक बेटे को जन्म दिया।

कांबली का फिल्मी सफर

क्रिकेट से सन्यास के बाद कांबली ने फिल्मों में अपना हाथ आजमाया, पहली बार वो फिल्म अनर्थ में संजय दत्त, सुनील शेट्टी और प्रीति झांगियानी में नजर आये। ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही, 2009 में दोबारा पल पल दिल के साथ नाम की फिल्म में नजर आये अजय जडेजा और माही गिल की ये फिल्म भी दर्शकों को नहीं भायीं तो फ्लॉप हो गई।

कांबली के पॉलिटिकल लाइफ पारी

क्रिकेट और फिल्म में फ्लॉप होने के बाद कांबली ने राजनीति में हाथ आजमाया, उन्होनें लोक भारती पार्टी से 2009 में विधानसभा का चुनाव लड़ा तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

टीम में 9 बार वापसी का भी मौका उन्हें मिला लेकिन वो अपनी जगह नहीं बना पाये, जिसका ठिकरा उन्होनें टीम कप्तान, चयनकर्ता और क्रिकेट बोर्ड पर लगाते हुए कहा कि उन्होनें उनका कैरियर बर्बाद कर दिया। वही अभी कुछ सालों से वो क्रिकेट, टीवी और सिनेमा के परदे से लगभग गायब हो चुके हैं। कहते है ना जीवन में किश्मत एक बार हर किसी का दरवाजा खटखटाती है और उस समय अगर सहीं फैसले लिए जाये तो वो सफलता को हर समय बरकरार रखते है।