10 मार्च के नतीजों से पहले कई मीडिया चैनल ने अपने सर्वे जारी किए है जिसे देखकर लग रहा है कि यूपी में एक बार फिर बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। एग्जिट पोल को अंतिम नतीजे नहीं कहा जाता है और इनकी प्रमाणिकता भी सही नहीं होती है। लेकिन इसके बाद भी इस बात के संकेत मिल जाते है कि जनता ने इस बार सरकार बनने के लिए किसे चुना है। इन नतीजों में सपा की सीट तो बढ़ रही है लेकिन सरकार बनाने जितना आंकड़ा उनके पास नहीं है।
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इस बार अखिलेश से बढ़े दलों की जगह छोटे दलों से गठबंधन करने का फैसला किया था लेकिन एग्जिट पोल के नतीजों में उनका फैसला सही साबित होता नहीं दिख रहा है। अगर 10 मार्च के नतीजे भी इसी तरह के रहे तो सपा को बहुत बड़ा नुकसान होना और सरकार बनाने का सपना टूट जाएगा। सपा के पास इस बार बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के कई बड़े मुद्वे थे लेकिन वह उनका चुनावों में सही प्रकार से भूना नहीं पाई और इसी वजह से उनकी सीटे बहुमत के आंकड़े के पार होती नहीं दिख रही है।
2017 और 2019 की तरह इस बार भी अखिलेश का दांव उल्टा पड़ता हुआ नजर आ रहा है और बीजेपी फिर से सत्ता में जबरदस्त वापसी करती दिख रही है। सपा ने रालोद, सुभासपा, महान दल, अपना दल (कमेरावादी) और प्रगतिशील मोर्चा से गठबंधन करके सभी पार्टियों को सीटें दी लेकिन इसके बाद भी वह सत्ता से बाहर होती दिख रही है।
सभी सर्वे में बीजेपी को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं तो वहीं, सपा को किसी भी सर्वे में 150 से ज्यादा सीटें मिलती नहीं दिख रही है।2017 की तुलना में अखिलेश यादव की सीटों में इजाफा हुआ है और 42 से वह 150 तक पहुंच गए है लेकिन सरकार बनाने के जादूई आंकड़े को छूने में सफल नहीं हो रहे है। सपा तीसरी बार चुनाव में गठबंधन के साथ उतरी है लेकिन एग्जिट पोल में सपा को इससे कोई फायदा नहीं होता दिख रहा है।
