Monday, 5 October 2026
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राजीव गांधी से जुड़े इस गांव को कहा जाता है साइबर ठगी का गढ़!

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राजीव गांधी से जुड़े इस गांव को कहा जाता है साइबर ठगी का गढ़!

साइबर ठगी का गढ़ जामताड़ा का नाम तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या अब आपको पता है साइबर ठगी वालों का ये अब पता पुराना हो गया है, अब नया ठिकाना बनाया है उस गांव को जहां के स्वतंत्रता सेनानिओं ने युद्ध में विरोधी देश के छक्के छुड़ाए थे, यहीं नहीं इस गांव की मिट्टी को तो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने माथे पर लगाया था, अब उस गांव की पहचान बन रहा है साइबर क्राइम, यानि अब उस गांव से आने वाला एक फोन कॉल आपका रुपयों से भरा बैंक अकाउंट खाली कर सकता है, साइबर ठगी के इस नए ठिकाने वाले गांव पर देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।

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मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले का थौना गांव इन दिनों पुलिस के लिए सिरदर्दी बना है, यहां के युवकों ने झारखंड के जामताड़ा के लोगों का व्यवसाय जो अपना लिया है, इस गांव के युवक भी मोबाइल के जरिए सीधे-साधे लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाते है, यहीं नहीं जब पुलिस आती है तो ये लोग यूपी बॉर्डर का फायदा उठाकर भाग जाते है, इस समय था जब इसी थौना गांव से इतनी स्वतंत्रता सेनानी निकले थे कि गांव स्वतंत्रता सेनानियों का गांव कहलाने लगा था, यहां तक उस समय के प्रधानमंत्री से इस गांव की मिट्टी मंगवाकर अपने माथे पर टीका किया था और आज वहीं थौना गांव साइबर अपराधियों का अड्डा बन गया है।
 
मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले का थौना गांव वैसे मध्यप्रदेश में है, लेकिन गांव में ही पड़ने वाला एक नाला मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है. थौना गांव के युवक यहां बैठकर ठगी करते हैं और जैसे ही पुलिस की भनक लगती है, तब तक ठगी करने वाले नाला पार कर उत्तर प्रदेश पहुंच जाते हैं. इन दोनों सीमा के बीच 100 मीटर का भी फर्क नहीं है, इसी का फायदा उठाकर खुलेआम धड़ल्ले से यहां के युवा मोबाइल पर अन्य राज्यों के लोगों से ठगी करते हैं, इसके चलते इस गांव में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों की पुलिस का आए दिन आना-जाना लगा रहता है. 


करीब 20 साल पहले गांव की आबादी 4500 लोगों की थी, लेकिन लेकिन अपराध बढ़ा तो आबादी कम हो गई. आज इस गांव की आबादी मतदाताओं के हिसाब से 2515 की है और 17 साल तक के बच्चों की आबादी 500 के करीब है. यह कहना गलत नहीं होगा कि करीब 3000 की आबादी वाले इस गांव के 1200 से 1300 लोग ऑनलाइन ठगी कर रहे हैं। स्थानीय पुलिस यहां पर सायबर अवेयरनेस को लेकर वैसे तो सतत अभियान चलाती रहती है, लेकिन इसके बावजूद इस गांव के युवा अन्य राज्यों में ठगी को अंजाम देते हैं.  साइबर ठग खुद को बैंक का कर्मचारी बताते हैं और मोबाइल धारकों से OTP समेत कई तरीकों से ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं।