राजस्थान कांग्रेस में जो हालात बने हुए है उसे देखकर लग रहा है कि पायलट अब जल्द ही अपनी पार्टी को अलविदा कहने की तैयारी कर रहे है। ऐसा हम नहीं पार्टी के हालात बया कर रहे हैं और इसका इंतजार पूरा मीडिया जगत कर रहा है कि पायलट ने जो 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था उसके बाद उनका अगला कदम क्या होगा। गहलोत ने पायलट की मांगों को लेकर जिस प्रकार का बयान दिया है उसे देखकर लग नहीं रहा है कि गहलोत इन मांगों पर जरा सा भी विचार कर रहे है और उन्होंने तो इन मांगों को गलत बताते हुए पायलट पर करारा हमला बोला है।
गहलोत और पायलट की जंग को खत्म करने के लिए दिल्ली में उच्च स्तीरिय बैठक होनी थी लेकिन किसी कारण के चलते बैठक नहीं हो पा रही है। उधर राजस्थान में पायलट 31 मई तक अपनी ही सरकार का इंतजार करेंगे की उसने उनकी मांगों पर किस तरह से लिया है। गहलोत के बयान के बाद लग रहा है कि पायलट अब कांग्रेस को अलविदा कहने का मन बना चुके है क्योंकि चुनावों का समय नजदीक आता जा रहा है और उनको लेकर कोई फैसला हो नहीं रहा है।
अगर चुनावों से पहले पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ इस तरह के आंदोलन करते रहेंगे तो उन पर दिल्ली आलाकमान सख्त एक्शन भी ले सकता है। पायलट भी इसी एक्शन का इंतजार कर रहे है ताकि जनता के सामने एक भावुक संदेश जाए और इसका फायदा उनको चुनावों में मिल जाए। पायलट को इस बात का पता है कि जनता उनके साथ है और कांग्रेस पार्टी उन एक्शन लेती है तो उनको जनता की बहुत ज्यादा सहानुभूति मिल जाएगी।
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पायलट ने जो मांगे रखी है वह कभी भी पूरी नहीं हो सकती है और ऐसे में आलाकमान उनसे बात करके कुछ समाधान निकाल सकता है। लेकिन पायलट अब आर-पार का ऐलान कर चुके है क्योंकि वह लंबे समय आलाकमान के भरोसे पर कुछ नहीं बोल रहे थे। लेकिन पायलट का सब्र अब टूटता हुआ दिख रहा है क्योंकि उनको पता है कि इस बार अगर उनको मौका नहीं मिला तो फिर आगे उनको मिलेगा भी नहीं। वहीं गहलोत फिर से सीएम पद की उम्मीदवारी का ऐलान कर चुके है और आलाकमान गहलोत पर कुछ एक्शन भी नहीं ले पाता है और इस बात को पायलट अच्छी तरह से जानते है।
