यूपी चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दलों की नजरे 10 फीसदी से ज्यादा ब्राह्मण वोटर पर टिकी हुई है। सभी पार्टियों को लग रहा है कि इस बार जीत में ब्राह्मण वोटर निर्णायक साबित होंगे। बीजेपी को सत्ता में लाने में सबसे बड़ा योगदान ब्राह्मण वोटर का माना जाता है और इसी वजह से बसपा, कांग्रेस और सपा ब्राह्मण वोटर को अपने पाले में लाने का भरपूर प्रयास कर रही है।
ब्राह्मणों को रिझाने के लिए बीजेपी का नया फार्मूला,देखें वीडियो
2017 में बीजेपी की जीत में ब्राह्मण वोटर का योगदान
2017 में 312 विधायकों में से बीजेपी को लगभग 60 विधायक ब्राह्मण समाज से चुनकर आए और जिसमें 9 विधायक मंत्री है। योग सरकार में ब्राह्मण की अनदेखी का आरोप लगा और ब्राह्मण वोटर की नारजगी बढ़ने लगी। इसके बाद मोदी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में ब्राह्मण वोटर की ताकत को देखते हुए उनके समाज के दो बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़ा। यूपी में ब्राह्मण वर्ग की नाराजगी को लेकर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में रणनीति बनाने में जुटा है और एक कमिश्न बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने की तैयारी में है।
2007 में मायावती ब्राह्मणों के सहारे सत्ता में पहुंची
'ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा' जैसे नारों के साथ 2007 में मायावती को जीत मिली थी और इस जीत में ब्राह्मण वोटर का बड़ा हाथ माना जाता है। 15 साल बाद फिर एक बार सत्ता में आने के लिए मायावती ने अपना पूरा फोकस ब्राह्मण वोटों पर केंद्रित किया है। इस काम के लए सतीष मिश्रा ब्राह्मण सम्मेलन बसपा की ताकत बढ़ा रहे हैं। बीएसपी इस बार लगभग 100 से ज्यादा ब्राह्मण चेहरे को चुनावी मैदान में उतार सकती है।
सबसे ज्यादा ब्राह्मण सीएम कांग्रेस ने दिए
यूपी में अपना वजूद बचाने के लिए इस बार कांग्रेस ने प्रियंका को अपना चेहरा बनया है। लेकिन किसी जमाने में यूपी में कांग्रेस को बोलबाला था और सबसे ज्यादा ब्राह्मण सीएम कांग्रेस ने ही दिए है। गोविंद बल्लभ पंत और नारायण दत्त तिवारी जैसे बड़ने चेहरे मुख्यमंत्री रहे हैं। प्रियंका गांधी अपने पुराने और परंपरागत ब्राह्मण वोटों को वापस लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
अखिलेश भी ब्राह्मण वोटर के सहारे
समाजवादी पार्टी भी ब्राह्मणों वोटर को रिझाने में पीछे नहीं है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बार यादव व ठाकुर वोटों के बजाय ब्राह्मण वोटर पर ज्यादा फोकस किया है। सपा ने परशुराम की प्रतिमा लगाने का वादा करके ब्राह्मण वोटर को अपने पाले में लाने का दाव चला है।
