चुनावों के समय सभी राजनीतिक दल सत्ता में आने के लिए हर तरह के प्रयास करते है और जनता को बड़े—बड़े सपने दिखाकर उनका वोट हासिल करने का प्रयास करते हैं। चुनावों से पहले पार्टियां कहती है कि वे अपराध खत्म करेंगे लेकिन टिकट देने की बारी आती है तो जो उम्मीदवार जीतना बड़ा अपराधी होता है उसे टिकट भी आसानी से मिल जाता है। जब उनसे सवाल किया जाता है तो कहते है कि कोर्ट ने अभी तक उनको सजा नहीं दी है इसलिए उनको टिकट दिया है।
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उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा विधानसभा सीटों वाला राज्य है और इस प्रदेश में सत्ता बनाने के लिए कोई भी पार्टी किसी भी हालात में पीछे नहीं रहती दिख रही है। विधानसभा चुनावों से पहले उम्मीदवारों को टिकट दिया जा रहा है और इन उम्मीदवारों की कुंडली देखने के बाद लग नहीं रहा है कि कोई भी पार्टी अपने वादों पर खरी उतर रही है।
उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए अब तक घोषित प्रत्याशियों की लिस्ट पर नजर डाले तो उनकी आपराधिक कुंडली पूरी कहानी बया कर रही है। इन उम्मीदवारों पर लगे आरोपों के आधार पर इनका आपराधिक रिकॉर्ड वेबसाइट देखने को मिल रहा है। भाजपा पे लगभग 200 प्रत्याशियों में से 80 उम्मीदवार पर आपराधिक केस दर्ज है तो सपा ने 160 में से 70 प्रत्याशी आपराधिक बैकग्राउंड वालों पर दावा खेला है। इस लिस्ट में कांग्रेस का स्तर थोड़ा सही नजर आ रहा है और उसने 170 में से 35 प्रत्याशियों को टिकट दिया है जो किसी केस से जुड़े है।
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कैराना विधानसभा सीट से नाहिद हसन,रामपुर विधानसभा सीट से आजम खां दोनों ही उम्मीदवार इस समय जेल में हैं। भाजपा, सपा और कांग्रेस ने अब तक 180 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है जिन पर आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी दलों को अपने प्रत्याशियों का आपराधिक ब्यौरा सार्वजनिक करना पड़ा है।
नेताओं की भाषा अब जनता को समझ में आ रही है और कई बार देखा गया है चुनावों में जाति नहीं अब विकास के नाम पर वोट हो रहा है। आपराधिक केस से जुड़े उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारकर पार्टियां अपने पांव पर ही कुल्हाड़ी मार रही है। अगर नेता ही अपराधी होंगे तो जनता का विकास कैसे करेंगे और उनके राज में जनता कैसे सुरक्षित रहेगी।
