Monday, 5 October 2026
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यूपी चुनावों का रूख मोड़ने की ताकत रखते है ये छोटे दल, बीजेपी और सपा भी इनके सहारे

उत्तर प्रदेश
यूपी चुनावों का रूख मोड़ने की ताकत रखते है ये छोटे दल, बीजेपी और सपा भी इनके सहारे

यूपी चुनावों पर पूरे देश की नजर और इसी वजह से सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। यूपी चुनावों में पहली बार बड़े दलों ने बीजेपी को हराने के​ लिए किसी प्रकार का गठबंधन नहीं किया है। इस बार कांग्रेस,सपा और बसपा ने छोटे दलों के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है। यूपी चुनावों में हर बार बड़े दलों को छोटे दलों के सहारे सरकार बनानी पड़ती है और इसी वजह से यूपी में सबसे ज्यादा छोटे दलों को अहमियत दी जाती है।

जातीय आधार वाले छोटे-छोटे दल अपने दम पर बड़े दलों की गणित बिगाड़ देते हैं। यूपी चुनावों में छोटे दलों की अहमियत किसी से छिपी नहीं है और इन दलों का वजूद जाति के आधार पर बहुत ज्यादा मजबूत है। इसी वजह से 2022 के चुनाव से पहले बीजेपी और सपा ने इन छोटे दलों के साथ गठबंधन किया है।

बीजेपी को ताकत दे रहे ये दो दल
उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने इस बार निषाद पार्टी और अपना दल के साथ चुनावी मैदान में उतने का फैसला किया है। 2017 के चुनाव में  ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के साथ गठबंधन करने का फायदा बीजेपी को मिला था। बीजेपी ने इस बार ज्यादा दलों के साथ गठबंधन नहीं किया है क्योंकि बीजेपी को उम्मीद है कि वह इस बार फिर से यूपी की सत्ता में दमदार तरीके से वापसी करेगी।

सपा ने बड़े दलों की जगह छोटे दलों पर जताया विश्वास
सपा ने इस बार बड़े दलों के साथ गठबंधन करने की जगह छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इस बार सपा ने सबसे ज्यादा छोटे दलों के साथ मिलाया है। सपा ने आरएलडी, सुभासपा, महान दल, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनवादी पार्टी, गोंडवाना पार्टी, अपना दल तथा कांशीराम बहुजन मूल निवास पार्टी जैसी कई पार्टियों के साथ गठबंधन किया है।


अपना दल 
अपना दल का यूपी के कुछ क्षेत्रों में बहुत अच्छा प्रदर्शन रहता है और इसी वजह से इस दल का यूपी की राजनीति में बहुत बड़ा योगदान है। इस बार अपना दल दो भागों में बटा हुआ है जो एक बीजेपी के साथ है तो दूसरा सपा के साथ है।

सुभासपा 
भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी का अस्तिव राजभर समाज के वोटों पर टीका है और इसी वजह से ओमप्रकाश राजभर को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद मिला था। लेकिन इसका भाजपा से गठबंधन टूट गया और सपा के साथ गठबंधन हुआ है।

निषाद पार्टी 
निषाद पार्टी बीजेपी के साथ चुनाव लड़ेगी। बीजेपी ने डॉ. संजय निषाद को एमएलसी भी बना दिया है और 2022 के चुनावों में यह दल बहुत ज्यादा कमाल दिखा सकता है। 

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आरएलडी 
पश्चिमी यूपी में जाट वोटों के बीच अपनी पकड़ बनाने वाली आरएलडी ने इस बार सपा के साथ चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। किसान आंदोलन के कारण आरएलडी का पलड़ा भारी हुआ है और सपा ने इसको बड़ा महत्व दिया है। 

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी 
शिवपाल यादव ने अखिलेश से अलग होकर यह पार्टी बनायी लेकिन इसका ज्यादा फायदा होने की जगह दोनों को नुकसान उठाना पड़ा। इस बार दोनों ने फिर एक साथ आने का रास्ता चुना है। 2022 के चुनाव में चाचा-भतीचे की जुगलबंदी बीजेपी के लिए राह कठिन कर सकती है।