उत्तर प्रदेश में दों चरणों का मतदान खत्म हो चुका है और इस बार भी वोटिंग प्रतिशत का ग्राफ कम ही रहा है। पहले चरण में 50 से 60 प्रतिशत तो दूसरे चरण में 60 से 62 प्रतिशत मतदान के आंकड़े मिले है जो 2017 के आंकड़ो के मुकाबले कम ही रहे है। दोनों चरणों की बात करें तो लगभग 5% मतदान कम हुआ है जो सत्ता पक्ष यानि योगी सरकार के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।
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पिछले विधानसभा चुनावों की बात करें तो इन सीटों पर मत प्रतिशत बढ़ा था और इसका फायदा विपक्ष को मिला था। 2012 और 2017 में 65.17% वोटिंग हुई थी लेकिन इस बार 62% वोटिंग हुई है सत्ता पक्ष के खिलाफ है यानी इस बार करीब 3% कम वोटिंग सपा की वापसी के संकेत दिखा रही है। पहले चरण का मतदान जाट बाहुल्य क्षेत्र में तो दूसरे चरण का मतदान मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में हुआ है और दोनों ही जगह मतदान प्रतिशत कम होना सत्ता परिवर्तन की तरफ इशारा कर रहा है। पहले फेज में 58 सीटों पर 61% वोटिंग हुई और 2017 में इन 58 सीटों पर औसतन 63 मतदान हुआ था यानी 3% वोटिंग कम हुई है।
2012 चुनाव के चुनाव का एनालिसिस
दो चरण की विधानसभा सीटों पर 2012 में मतदान प्रतिशत कम हुआ था और लगभग 100 से ज्यादा सीटों पर हुए चुनाव में सपा को 70 से 75 सीटों पर जीत हासिल की थी और बसपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सपा ने सरकार बनाई और बसपा को विपक्ष में बैठना पड़ा था।
2017 चुनाव के चुनाव का एनालिसिस
सत्ता पक्ष यानी सपा को 2017 के चुनावों में इन दो चरणों की विधानसभा सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा था। 2012 के मुकाबले में 2017 में मतदान प्रतिश बढ़ा था जो बीजेपी के लिए फायदेमंद रहा है और सपा के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ। बीजेपी ने लगभग 80 से ज्यादा सीटों पर चुनाव जीता और सपा को विपक्ष में बैठा दिया।
2022 चुनाव के चुनाव का एनालिसिस
इस बार भी 2012 जैसा बड़ा धमाका होता दिख रहा है और दो चरणों का मतदान प्रतिशत कम होना सत्ता पक्ष के लिए खतरे की घंटी है तो सपा की वापसी के संकेत है। इस बार 2 चरणों का मतदान लगभग 5 प्रतिशत कम है जो सपा की जबरदस्त वापकी की तरफ इशारा कर रहा है। इस बार बीजेपी को विपक्ष में बैठने की तैयारी कर लेनी चाहिए क्योंकि इस बार सपा की सरकार बनने जा रही है।
