यूपी देश का सबसे बड़ा विधानसभा सीटों वाला प्रदेश है और इस प्रदेश की सरकार दिल्ली में बैठी सरकार को भी हिलाने की ताकत रखती है। 2022 का चुनाव इस बार सभी पार्टियों के लिए करो या मरो से कम नहीं है और इसी वजह से सभी दल हर मुद्दे को अपने चुनावी घोषणा पत्र में जोड़कर विपक्ष पर हमला बोल रहे हैं।
2022 के चुनाव में ये मुद्दे दिलाएंगे बंपर जीत
1. धर्म : यूपी चुनावों में सबसे ज्यादा धर्म के नाम पर राजनीति होती रही है और इस बार भी ऐसा होता नजर आ रहा है। सभी पार्टियां एक दूसरे को धर्म की रक्षा करने का दावा कर रही है और धर्म के नाम वोट मांग रही है। इस बार राम मंदिर का मुद्दा हर कोई भुनाने का प्रयास कर रहा है लेकिन यूपी की जनता को तय करना है कि वह किसी अपनी सरकार चुनेगी।
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2. विश्वनाथ कॉरिडोर :काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर बीजेपी और सपा में जबरदस्त जंग देखने को मिल रही है। दोनों पार्टियां इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रही है और जनता को तय करना है कि वह इकसा श्रेय किसे देती है।
3. सुरक्षा: यूपी देश का ऐसा राज्य है जहां कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते है लेकिन योगी सरकार में जिस तरह से अपराधियों पर लगाम कसी गयी वह बहुत ही हैरान कर रही है। योगी सरकार में बड़े—बड़े अपराधियों पर कानून का डंडा चला है और विपक्ष इसमें भी भेदभाव करने का आरोप लगा रहा है।
4. रोजगार: यूपी में बेरोजगारों की संख्या बहुत ज्यादा है और इसी वजह से विपक्ष रोजगार के नाम सरकार को घेर रहा है। वहीं योगी सरकार रिकॉर्ड तोड़ नौकरी देने का वादा कर रही है। अब यह प्रदेश के बेरोजगार तय करेंगे कि वह किसके साथ जाते हैं।
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5. विकास: यूपी चुनावों में अब विकास की बात पर भी ज्यादा जोर दिया जा रहा है और सरकार प्रदेश की जनता से इतने बढ़े वादे कर रही है जिनके बारे में सुनकर एक बार तो हैरानी हो जाती है।
6. मुस्लिम: यूपी में मुस्लिम वोटर कई सीटों पर अपना दमखम दिखाते है और इसी वजह से सभी पार्टिया मुस्लिम वोटरों को लुभाने में लगी हुई है। लेकिन पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटरों का रूझान बीजेपी की तरफ बढ़ा था और इस बार वह कितना बढ़ता है या कम होता देखने की बात होगी।
7: दलित: यूपी में कई नेता और दल दलितों को लेकर राजनीति करते है और उनके भरोसे ही उनकी राजनीति चमक रही है। कई बड़े नेता अपने आपको दलितों का सबसे बड़ा नेता बताते है और उनके हमदर्द बनते है। इस बार दलितों के सामने बड़ी चुनौती होगी कि वह इस बार किसे सरकार बनाने का मौका देगें।
