यूपी चुनावों के इतिहास के बात करें तो हमेशा से ही यहां धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगे जाते है और इस काम में सभी दल एक से बढ़कर एक है। सभी दल एक दूसरे पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते है लेकिन चुनावों के समय खुलकर जाति और धर्म का कार्ड खेलते है।
बीजेपी ने हमेशा से ही राम मंदिर बनाने के लिए अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा करती थी लेकिन इस बार राम मंदिर बन गया है तो उनके चुनावी घोषणा पत्र से इस वादे को हटा दिया गया है। इस बार यूपी चुनावों में राम मंदिर से ज्यादा भगवान कृष्ण को लेकर राजनीति हो रही है और बीजेपी के नेताओं ने कई बार बयान दिया है कि अयोध्या व काशी के बाद मथुरा की बारी है।
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इस बात को सभी लोग जानते है कि मथूरा का विवाद भी अयोध्या जैसा ही है और इसी वजह से बीजेपी इसे चुनावी मुद्दा बनाने में लगी हुई है। लेकिन इस बार बीजेपी को उसकी ही चाल में मात देने के लिए सपा ने भी भगवान कृष्ण का सहारा लिया है। अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘भगवान श्रीकृष्ण मेरे भी सपने में रोज आते हैं और कहते हैं कि इस बार समाजवादी सरकार बनने जा रही है।
अखिलेश ने लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र में लगाई गई भगवान परशुराम मूर्ति और 68 फीट उंचे फरसे का अनावरण करके यह संदेश दिया है कि इस बार वे हिन्दु कार्ड पर चुनावी मैदान जीतने की तैयारी में है। राम मंदिर पर सपा का कहना है कि इसका निर्माण कोर्ट के कारण हुआ है और बीजेपी इसका श्रेय ले रही है।
भगवान श्रीकृष्ण मेरे भी सपने में रोज आते हैं के बयान के बाद भाजपा सांसद हरनाथ सिंह ने मथुरा मुद्दे को चुनावी रंग दे दिया है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यदुवंशी हैं और वह यदि कृष्ण वंशी है तो मंच से खड़े होकर बोलें कि भगवान कृष्ण की जन्मभूमि पर मथुरा में मंदिर बनना चाहिए। इसके बाद सांसद ने कहा कि रात को सपन में भगवान कृष्ण मुझसे कह रहे हैं कि मैं योगी जी को मथुरा से चुनाव लड़ने के लिए आग्रह कंरू और इसके लिए मैंने एक पत्र लिखकर आलाकमान को बता दिया है।
सीएम योगी ने पहले ही इस बात को लेकर कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर बना, काशी में विश्वनाथ का धाम बना तो मथुरा-वृंदावन कैसे छूट जाएगा। अयोध्या-काशी के बाद अब मथुरा की तैयारी का नारा यूपी की चुनावी रैलियों में गूंज रहा है। अगर सीएम योगी मथुरा से चुनावा लड़ने का फैसला करते है तो यह सपा के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा। अयोध्या, काशी, मथुरा तीनों जगहों पर मंदिर-मस्जिद का विवाद रहा है और इसी वजह से बीजेपी के अलावा कोई दल इस मसले पर बोलने के लिए तैयार नहीं होता है।
श्रीकृष्ण के जन्मस्थल पर शाही ईदगाह ट्रस्ट ने 13.37 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। शादी ईदगाह मस्जिद कृष्ण जन्मभूमि के पास में बनी है और इतिहासकार मानते हैं कि मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था।
