दो सप्ताह से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन रूस और यूक्रेन की जंग का अभी तक कोई परिणाम नहीं निकल पाया है। दोनों देशों से पूरी दुनिया बातचीत के जरिए इस विवाद का हल निकालने की बात कह रहे है लेकिन इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। जंग के इतने दिन बीत जाने के बाद पहले बार यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमिर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अब NATO की सदस्यता नहीं लेगा।
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उन्होंने कहा यूक्रेन से अलग हुए डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्र को लेकर 'समझौता' करने के लिए तैयार हैं। पुतिन ने जंग से पहले इन दोनों शहरों को आजाद घोषित किया था और अलग मान्यता दी थी। रूस और यूक्रेन इन कारणों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था और इन बातों को लेकर जंग खत्म हो सकती है।
जंग से पहले जेलेंस्की को NATO सहयोग करने की बात कह रहा था लेकिन जंग के बाद ऐसा नहीं हुआ तो यूक्रेन का इस संगठन से भरोस उठ गया। NATO की सदस्यता को लेकर जेलेंस्की ने कहा कि वह ऐसे देश का राष्ट्रपति नहीं बनना चाहते, जो घुटनों के बल कुछ मांग रहा हो। रूस जंग के पहले से ही इस बात का दावा कर रहा था कि यूक्रेन NATO में शामिल होगा तो वह इसके गंभीर परिणाम भुगतेगा।
रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन के कुछ लड़ाकू विमानों को रोमानिया और यूक्रेन के अन्य पड़ोसी देशों में तैनात किया जा रहा है। इसके बाद लगने लगा है कि यह जंग रूकने वाली नहीं है और इस जंग का दायरा बढ़ सकता है। इजराइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने रविवार शाम को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर बात की है।
