शुक्रवार शाम को ओडिशा में हुए भीषण ट्रेन हादसे में अब तक 300 लोगों की जान चली गई है। इस हादसे के बाद पीएम मोदी मौका स्थल पर पहूंच रहे है और घायलों से मिलेंगे। लेकिन इस हादसे ने फिर से उन जख्मों को हरा कर दिया है जो ट्रेन हादसों के रूप में मिले थे। भारत में ट्रेन की शुरूआत तो अंग्रेजों के समय हो गई थी लेकिन आज भारत में ट्रेन सर्विस विदेशों जैसी नहीं बन पा रही है। इस हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे है की कब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
आज हम आपको भारतीय रेलवे के सबसे दर्दनाक हादसों के बारे में बताने जा रहे हैं।
1964 को पंबन-धनुस्कोडि पैसेंजर ट्रेन रामेश्वरम चक्रवात की चपेट में आने से 126 से अधिक यात्रियों को जान गंवानी पड़ी थी।
देश में सबसे बड़ी रेल दुर्घटना 1981 में हुई थी। इस दिन बिहार में पुल पार करते समय ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी जिसमें 750 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। एक पूरी ट्रेन नदी में डूब गई जिसके बार में किसी ने नहीं सोचा था।
1995 को फिरोजाबाद के पास खड़ी ट्रेन से दूसरी ट्रेन टकरा गई थी और इस घटना में 305 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी।
1998 को जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस पटरी से उतरी तो 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
एक बार फिर आमरण अनशन की ओर मंत्रालयिक कर्मचारी
1999 को गैसल ट्रेन दुर्घटना में 285 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इस हादसे में ज्यादा जान गंवाने वालों में सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान शामिल थे।
2002 को रफीगंज ट्रेन हादसा हुआ जिसमें ट्रेन नदी को पार करते समय हादसा हुआ। जिसमें 140 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
2016 को पुखरायां ट्रेन पटरी से उतरी तो 150 लोगों की मौत हो गई थी और 250 लोग घायल हो गए थे।
