भारत में गांधी परिवार आजादी से पहले और आजादी के बाद से मुख्य भूमिका में रहा है। इस परिवार का इतिहास किसी से छूपा नहीं है लेकिन आजादी के बाद से 50 सालों तक देश पर शासन करने वाला यह परिवार आज अपने अंतिम पड़ाव की तरफ बढ़ रहा है। क्योंकि पिछले 10 सालों की बात करें तो कांग्रेस का देश में जनाधार घटा है और इसके कारण उसके कई बड़े नेता पार्टी छोड़ रहे है। लेकिन अब उनकी परेशानी इस तरह से बढ़ गई है कि कांग्रेस के नेता जिस राहुल गांधी को पीएम बनाने का सपना देख रहे है उनकी संसद सदस्यता ही खत्म हो गई है।
Rahul Gandhi के बयान से सदस्यता रद्द तक की कहानी.
अगर आने वाले समय में उनको ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिलती है तो वह 8 साल तक संसद में कदम भी नहीं रख पाएंगे। क्योंकि मोदी सरनेम मामले में 2 साल की सजा के बाद संसद सदस्यता गंवा चुके राहुल गांधी एक नाम ऐसा कलंक लगा है जो पहले उनके ही परिवार के दो लोगों पर लगा था। राहुल अपने परिवार के तीसरे शख्स है जो सदस्यता गंवाई है। राहुल से पहले उनकी दादी इंदिरा गांधी और मां सोनिया गांधी की भी सदस्यता जा चुकी है।
1971 के आम चुनाव में कांग्रेस बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। लेकिन उन चुनावी धांधली का आरोप लगा था और इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संसद सदस्य रद्द करने का फैसला दिया। इसके ठीक बाद इंदिरा ने देश में आपाताकाल लगा दिया था।
2006 में रायबरेली से सांसद थीं और यूपीए सरकार थी। सोनिया गांधी के खिलाफ लाभ के पद का मामला बना था और इसके कारण सोनिया गांधी को लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था।
राहुल की सदस्यता रद्द
सूरत की कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानि मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। लेकिन नए कानुन के तहत दो साल या उससे ज्यादा की सजा के बाद संसद और विधानसभा की सदस्यता चली जाती है। लेकिन इस बार राहुल 6 साल चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे अगर उनको राहत नहीं मिलती है तो यानी कुल 8 साल वो संसद से दूर हो जाएंगे।
