कंगना ने अपने इस संदेश में लिखा स्वतंत्रता के लिए लड़ने वालों को मालिकों को सौंप दिया, जिनमें अपने ऊपर अत्याचार करने वालों से लड़ने की ना तो हिम्मत थी ना ही खून में उबाल और ऐसे लोग सत्ता के भूखे और चालाक लोग ही थे। हमें सिखाया अगर कोई तुम्हें एक गाल पर थप्पड़ मारे तो उसके आगे दूसरा गाल कर दो और इस तरह तुमको आजादी मिल जाएगी। इस प्रकार हमे आजादी सिर्फ भीख में मिली है और आपको समझदारी से अपना हीरो चुनना होगा।
कंगान ने कहा कि अगर गांधी जी चाहते तो भगत सिंह को फांसी नहीं होती लेकिन उन्होंने भगत सिंह और नेताजी को सपोर्ट नहीं किया। गांधीजी चाहते थे कि भगत सिंह को फांसी हो जाए और उनकी जयंती पर उनको याद करने से कुछ नहीं होगा। पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद कंगना ने भारती की आजादी के इतिहास पर लगातार ऐसे बयान दे रही है जो सभी को हैरान कर देने वाले हैं।
कंगना ने कहा था कि हमें आजादी 1947 में नहीं बल्कि साल 2014 में आजादी मिली है। उनके इस बयान के बाद कंगना के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज करवाई गईं। सोशल मीडिया पर उनसे पद्मश्री वापस लेने की मांग भी उठी थी।
