ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को साल की सबसे बड़ी निर्जला एकादशी का पर्व मनाया जाता है। इस एकादशी को करते समय प्राचीन कथा में बताया गया है कि भीम ने एक मात्र इसी उपवास को रखा था और मूर्छित हो गए थे। इस वजह से इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर बिना जल ग्रहण किए उपवास रखने से बहुत बड़ा पुण्य प्राप्त होता है। इसके करने से इंसान को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से प्राप्ति भी मिल जाती है।
Nirjala Ekadashi 2023 Pujan vidhi
इस व्रत को करने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। जैसे सबसे पहले आपको जल्दी उठना होगा फिर स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें। अच्छे और साफ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें। उनको को खुश करने के लिए आपको 3 घंटे तक श्री हरि और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना होगा। यह व्रत निर्जला ही रखना पड़ता है और अन्न के साथ जल भी ग्रहण नहीं करना होता है। किसी निर्धन व्यक्ति को दान करने से आपको इस व्रत को पूर लाभ मिलेगा।
Nirjala Ekadashi 2023 Shubh muhurt
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 31 मई को शुरू होगा। उदिया तिथि के चलते निर्जला एकादशी का व्रत 31 मई को रखा जाएगा।
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निर्जला एकादशी पर नहीं करें ये काम
इस दिन चावल नहीं बनाने चाहिए
तुलसी के पत्ते न तोड़ें
इस दिन व्रत करने वाले लोगों को शारीरिक संबंध बनाने से बचना होगा
इस दिन मांस और मदिरा का सेवन ना करें
इस दिन किसी को परेशान नहीं करें
Nirjala Ekadashi 2023 Katha
इस दिन व्रत करने के साथ आपको एकादशी की कथा जरूर सुननी चाहिए। ऐसा करने से आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी और ज्ञान मिलेगा।
