Monday, 5 October 2026
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राष्ट्रपति मुर्मू का अध्यात्म और पर्यावरण पर संदेश जनजातीय महासम्मेलन में पहुंचीं

मध्य प्रदेश
राष्ट्रपति मुर्मू का अध्यात्म और पर्यावरण पर संदेश जनजातीय महासम्मेलन में पहुंचीं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्यप्रदेश के बैतूल में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित जनजातीय महासम्मेलन में शिरकत की जहां उन्होंने आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद राष्ट्रपति ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वही इस मौके पर मंच पर उनका पारंपरिक स्वागत किया गया और उन्हें मोमेंटो भेंट कर सम्मानित भी किया गया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार करती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।  राष्ट्रपति मुर्मू ने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सराहना की और कहा  कि आदिवासी समाज ने अपनी विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है। उनके जीवन में संवेदना, सहयोग, ईमानदारी और सादगी जैसे मानवीय मूल्य गहराई से जुड़े हुए हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं।  राष्ट्रपति का कहना है की जनजातीय समुदाय का प्रकृति के प्रति गहरा जुड़ाव और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण का दृष्टिकोण आज के समय में पूरे देश के लिए अनुकरणीय है। राष्ट्रपति ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया और कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बहुत जरूरी है। कार्यक्रम में कलाकारों के द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं जिससे पूरा वातावरण उत्साह और संस्कृति से भरा नजर आया...  इसके बाद महासम्मेलन की औपचारिक प्रक्रिया संपन्न हुई पूरे आयोजन में अध्यात्म, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश देखने को मिला।