राजस्थान कांग्रेस में विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से जबरदस्त वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है। लेकिन इस बार पायलट आर—पार के मुड़ में नजर आ रहे है और पहले पार्टी के खिलाफ अनशन किया फिर पार्टी को साफ शब्दों में कह दिया है कि अभी नहीं तो कभी नहीं। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली आलकामन भी इस गुटबाजी से दूर भागने का प्रयास कर रहा है और वह इस इतंजार में है कि पायलट अपनी तरफ से ऐसा कदम उठाए जिससे उनको बाहर करने का मौका मिले।
चुनावों से पहले सीएम गहलोत ने साफ शब्दों में कह दिया है कि उनकी फिर से सरकार बनने जा रही है। लेकिन पायलट अलग ही अंदाज में बाते कर रहे हैं और दबाव बनाने का प्रयास कर रहे है। लेकिन पायलट को लेकर अब फैसला नहीं होगा केवल उनकी कार्यशैली पर नजर रखी जाएगी। कर्नाटक चुनावों में पायलट को बाहर का रास्ता दिखा दिया है जो इस बात का संकेत है कि उनको अब ज्यादा महत्व नहीं दिया जाएगा। लेकिन उनको पंजाब में होने वाले उपचुनावों की जिम्मेदारी दी गई है जो कई सवाल खड़े कर रही है।
चुनाव आते ही सड़कों पर उतरी BSP
पायलट को अब समझ आ गया है कि पार्टी उनको लेकर कोई फैसला नहीं लेगा अब उनको ही कुछ करना होगा। आलाकमान सीएम गहलोत को लेकर खुश है और वह नहीं चाहता कि पंजाब की तहर यहां भी उसको हार मिले। इसलिए पंजाब से आए प्रभारी रंधावा ने साफ कह दिया है कि पार्टी से कोई बड़ा नहीं है अगर कोई गलत बात बोलेगा तो उसको पार्टी से बाहर का रास्त दिखा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री गहलोत का कद पार्टी में बहुत बड़ा है और लंबे समय से वह पार्टी को हर प्रकार से सहयोग किया है। कर्नाटक चुनाव के स्टार प्रचारकों की सूची में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का तो नाम इस बात को सही साबित करता है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर सभी विधायक से फीडबैक लिया गया है और उसकी रिपोर्ट दिल्ली भेज दी गई हैं इसके बाद रंधावा ने सख्त अंदाज में बयान दिया है।
