Monday, 5 October 2026
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JNU वीसी के बिगड़े बोल, भगवान ऊंची नहीं नीचे जाति के...,  शिव थे आदिवासी

रेसिपी
JNU वीसी के बिगड़े बोल, भगवान ऊंची नहीं नीचे जाति के...,  शिव थे आदिवासी

देश की राजधानी दिल्ली का जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी हमेशा से किसी ना किसी प्रकार के विवादों के कारण चर्चा का विषय बना रहता है। इस यूनिवर्सिटी का छोटा सा विवाद भी राजनीति का मुद्वा बन जाता है और इसके बाद उस पर जमकर राजनीति होनी शुरू हो जाती है। इस यूनिवर्सिटी का विवाद देश के हर क्षेत्र तक फैल जाता है और इस बार विवाद भगवान की जाति को लेकर हुआ है जो जल्द ही पूरे देश में गुंजेगा। जेएनयू की कुलपति ने शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित ने हिन्दु देवी.देवताओं की जाति को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसकी जमकर आलोचना हो रही है और इस बयान पर मांफी मांगने  का दबाव बनाया जा रहा है।

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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने दिल्ली में एक सेमिनार रखा गया था जिसका जिसका विषय था. डॉ अम्बेडकर थॉट ऑन जेंडर जस्टिसरू डिकोडिंग द यूनिफॉर्म सिविल कोड। इस दौरान शांतिश्री ने कहा कोई देवता ब्राह्मण नहीं है और सबसे ऊंचा दर्जा क्षत्रिय का है। शिव जरूर अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के होंगे क्योंकि वह श्मशान में सांप के साथ बैठते हैं। 

उनके पास पहनने के लिए कम कपड़े हैं और मुझे नहीं लगता कि ब्राह्मण कब्रिस्तान में बैठ सकते हैं। इस बात से पता चलता है कि देवता ऊंची जाति से नहीं थे। अगर हमारे समाज कुछ अच्छा करना है तो जाति को खत्म करना जरूरी है।


अपने भाषण में शांतिश्री ने राजस्थान में नौ साल के दलित लड़के की मौत का जिक्र किया। दुर्भाग्य से आज जाति जन्म के आधार पर होती है पहले ऐसा नहीं होता था। हम इंसान है और हम इस प्रकार का भेदभाव करेंगे तो समाज का विकास नहीं होगा। इस बात को लेकर उनका विरोध हो रहा है कि लेकिन उन्होंने जातिभेदभाव को लेकर अपनी बात रखी थी। लेकिन इस पद पर बैठे लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि हम अपनी बात को इस तरह से रखे कि किसी भी इंसान को ठेस नहीं पहुंचे और लोगों को वह बात आसानी से समझ आ सकें।