ज्वाला माता का मंदिर हिमाचल प्रदेश में है, लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जोबनेर में ज्वाला माता का एक शक्तिपीठ ओर भी है जो अपने चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है.इस मंदिर में हमेशा भक्तों का तातां लगा रहता है औऱ दूर दूर से लोग मां के दर्शन के लिए जोबनेर पहुंचते है.चलिए आपको भी दर्शन करवाते है जोबनेर के शक्तिपीठ मां ज्वाला मंदिर के.
देश के अन्य शक्तिपीठ की तरह ही यहां भी चैत्र और आश्विन नवरात्रों में 9 दिन तक मेले सा माहौल बना रहता है.चैत्र लक्खी मेले मे रोजाना करीब 15 से 20 हजार श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते है..चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन व हिंदू नववर्ष की शुरुआत पर सुबह से ही माता रानी के दरबार में श्रद्धालुओं की भीड देखी जाती है और लोगो जय माता की के जयकारों के साथ अपने नए साल की शुभकामना लेकर मंदिर पहुंचते है.हर वर्ष की भांति इस बार भी जोबनेर कस्बे की पहाड़ी पर स्थित ज्वाला माता का प्रसिद्ध लक्की मेला शुरू हो चुका है।
कैसे मनाए माँ शैलपुत्री को और प्राप्त करें सुख, समृद्धि
मंदिर के इतिहास की बात करे तो मंदिर का प्रारूप चौहान काल में संवत 1296 में बना. जगमाल पुत्र खंगार जोबनेर के वीर शासक थे और उन्हें राव खंगार को ज्वाला माता ने सपने में आकर बड़ा मंडप बनाने की प्रेरणा दी...और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार उसके बाद से ही मंदिर का विकास शुरु हुआ जो लगातार जारी है.हांलाकि पिछले दो वर्ष में कोरोना काल के दौरान धार्मिक स्थलों के बंद होने से
