इन दिनों 5 राज्यों में चुनावी माहौल बना हुआ है और इसी वजह से नेता टिकट के चक्कर में किसी भी हद तक जाने को तैयार है। कई उम्मीदवार तो टिकट नहीं मिलने पर दल बदल रहे है तो कुछ लोग अपने परिवार को टिकट दिलाने के लिए एड़ी—चोटी का जोर लगा रहे हैं। लेकिन इसके बाद नेताओं को टिकट नहीं दिया है।
यूपी चुनावों में टिकट नहीं मिलने के कारण सबसे ज्यादा माथापची देखने को मिल रही है और इसी वजह से टिकट मिलने पर देरी हो रही है। यूपी में परिवारवाद का ज्यादा बोलबाला देखने को मिल रहा है और इसी वजह से टिकट देने में देरी हो रही है। इस बार यूपी में पति—पत्नी ही एक ही सीट से दावेदार कर रहे है और इसी वजह से दोनों में अपनी सीट गंवा दी और इसका फायदा तीसरे शख्स को मिला है।
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लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट को लेकर मौजूदा विधायक और योगी सरकार की मंत्री स्वाति सिंह और उनके पति दयाशंकर सिंह अपनी दावेदारी कर रहे थे। एक ही सीट से दोनों की दावेदारी करना बीजेपी के लिए परेशानी बनी हुई थी और इसी वजह से भाजपा ने इस सीट से ED के ज्वाइंट डायरेक्टर रहे राजराजेश्वर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है।
मंत्री स्वाति सिंह की दावेदारी और टिकट कटने की कहानी बहुत ही मजेदार है। इस सीट के लिए पति-पत्नी एक दूसरे के जानी-दुश्मन बन गए और अपना टिकट गंवा दिया।
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दोनों ने एक-दूसरे को टिकट कटवाने के लिए एक दूसरी की बुराई आलाकमान के पास करी है। स्वाति सिंह का विधायक बनने का कारण भी दयाशंकर ही थे। स्वाति के मंत्री बनने के बाद तेवर बदल गए और इसके बार पति उनकी शिकायतें दिल्ली तक करने लगे।
2017 में सरोजनी नगर सीट से जीत दर्ज करने के बाद राज्यमंत्री बनी पत्नी स्वाति और पति दयाशंकर का संघर्ष बढ़ गया। मंत्री बनने के बाद स्वाति सिंह का कई बड़े विवादों में नाम जुड़ गया। इस बार बीजेपी ने दोनों को किनारे करते हुए राजराजेश्वर सिंह को मौका दिया है।
