दोनों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है और राष्ट्रीय लोक दल को 30-35 सीटें मिलने का अनुमान है। इस गठबंधन में जातिगत वोट को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है जिस क्षेत्र में जाट बाहुल्य सीटे होगी वहां RLD चुनाव लड़ेगी और जहां मुस्लिम बाहुल्य सीटे होगी वंहा समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ेगी। जयंत चौधरी ने 19 नवंबर को बयान दिया था कि इस महीने के अंत तक रालोद और समाजवादी पार्टी के गठबंधन का ऐलना हो जाएगा।
समाजवादी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और जनवादी पार्टी के संजय चौहान के साथ गठबंधन का पहले ही हो चुका है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोकने के लिए जयंत चौधरी के साथ गठबंधन किया गया है। रालोदा का ज्यादा प्रभाव पश्चिमी यूपी के 10 जिलों में ज्यादा माना जाता है और किसान आंदोलन के समय भी इसी क्षेत्र से किसानों का दबदबा देखा गया था।
अगर जाट वोट रालोदा के खाते में जाते है तो इसका नुकसान बीजेपी को होगा क्योंकि इस बार बीजेपी का सीधा मुकाबला सपा से है। लेकिन दूसरी तरफ किसान बिल वापसी के फैसले के बाद बीजेपी की राह थोड़ी आसान हुई है क्योंकि अब वह किसानों को अपने पाले में करने के लिए मोदी सरकार के फैसलों को सही बतायेगी।
