Monday, 5 October 2026
अभी का दौर

सरकारी अस्पतालों में इलाज होगा पूरी तरह डिजिटल: 31 जुलाई 2026 तक लागू होगा 'डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल'

संक्षेप में

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में 31 जुलाई 2026 तक इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम के डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल को अनिवार्य किया गया है, जिससे मरीजों का इलाज डिजिटल होगा और उनका उपचार इतिहास आभा आईडी के माध्यम से कहीं भी उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्य बातें

  • 31 जुलाई 2026 तक आईएचएमएस डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल अनिवार्य होगा
  • मरीजों का आभा लिंक्ड इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा
  • अंतिम उपचार निर्णय और ई-प्रिस्क्रिप्शन की जिम्मेदारी डॉक्टर की होगी
  • अस्पतालों में कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी
आपणो राजस्थान
सरकारी अस्पतालों में इलाज होगा पूरी तरह डिजिटल: 31 जुलाई 2026 तक लागू होगा 'डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल'

प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों के उपचार की प्रक्रिया अब डिजिटल होने जा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिला, उप जिला, सैटेलाइट अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में 31 जुलाई 2026 तक 'इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम' (आईएचएमएस) के डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल का शत-प्रतिशत संचालन अनिवार्य कर दिया है।

आभा आईडी से लिंक होगा हेल्थ रिकॉर्ड

नई व्यवस्था के तहत, हर मरीज का 'आभा' (ABHA) लिंक्ड इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) तैयार किया जाएगा। डॉक्टर परामर्श से लेकर जांच और दवाओं का पूरा ब्योरा इसी मॉड्यूल में दर्ज होगा। इससे मरीज को यह लाभ होगा कि प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में जाने पर उसका पुराना उपचार इतिहास तुरंत उपलब्ध हो सकेगा। विभाग का मानना है कि इससे उपचार प्रक्रिया न केवल अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि उसमें तेजी भी आएगी।

डॉक्टरों की जिम्मेदारी और तकनीकी सहयोग

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओपीडी सेवाओं में डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल का उपयोग अनिवार्य होगा। इसके लिए प्रत्येक चिकित्सक को कंप्यूटर, इंटरनेट और लॉगिन आईडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। डेटा एंट्री के कार्य में डॉक्टरों की सहायता के लिए जीएनएम, नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर ऑपरेटर और इंटर्न की सेवाएं ली जा सकेंगी। हालांकि, मरीज की जांच, दवाओं का चयन और ई-प्रिस्क्रिप्शन जारी करने की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित चिकित्सक की ही रहेगी।

सीएमएचओ और पीएमओ को निगरानी के निर्देश

चिकित्सा विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों (पीएमओ) को समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध ने बताया कि जिला और ब्लॉक स्तर पर तकनीकी प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन अस्पतालों में कंप्यूटर, लैपटॉप या टैबलेट जैसे आईटी उपकरणों की कमी है, वहां नियमानुसार इनकी खरीद की जाएगी ताकि डिजिटल परामर्श में कोई बाधा न आए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सरकारी अस्पतालों में डिजिटल व्यवस्था कब तक लागू होगी?

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में 31 जुलाई 2026 तक आईएचएमएस के डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल का शत-प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मरीजों को इस नई डिजिटल व्यवस्था से क्या लाभ होगा?

मरीजों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और वे प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में अपना उपचार इतिहास देख सकेंगे, जिससे इलाज की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित हो जाएगी।

क्या डेटा एंट्री के लिए डॉक्टर को खुद काम करना होगा?

नहीं, डॉक्टरों की सहायता के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर, नर्सिंग कर्मी और इंटर्न की सेवाएं ली जा सकेंगी, लेकिन अंतिम निर्णय और ई-प्रिस्क्रिप्शन जारी करने की जिम्मेदारी चिकित्सक की ही होगी।