हमारे समाज में किन्नर समाज को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है लेकिन वह अपने आप को बहुत ही बदकिस्मत मानते हैं। किन्नर समाज के कुछ ऐसे नियम होते है जिनकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती है। ऐसी एक बात हम आपको बताने जा रहे है जिसके बारे में सुनकर आपको हैरानी हो होगी लेकिन आपका इस पर दया भी आएगी। सभी धर्मो में अगर कोई इंसान मर जाता है तो उसकी शव यात्रा दिन में निकाली जाती है लेकिन किन्नर समाज में ऐसा नहीं है। इसके पीछे उनकी एक मान्यता है जिसमें वह रात के समय में ही शव यात्रा निकालते है जिसे दुसरे लोग नहीं देख पाए।
हमारे समाज में तीसरे लिंग यानी कि थर्ड जेंडर का दर्जा किन्नर को दिया गया है। इनका अपना एक अलग समाज होता है और अलग-अलग रीति-रिवाज होते हैं। किन्नर की शव यात्रा किसी ने नहीं देखी है और ना हीं कोई देखेगा। किन्नरों के शव यात्रा में भी छुपे हैं कई राज जो आपके लिए बहुत जरूरी है। किन्नरों की शव यात्रा में इनके समुदाय के अलावे दूसरे समुदाय के किन्नर भी मौजूद नहीं होते है। यह इतनी ज्यादा गुप्त होती है किन्नरों की शव यात्रा देखना किसी के लिए आसान काम नहीं है।
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जब सभी लोग सो जाते है तब किन्नर समाज शव यात्रा निकालता है। किसी किन्नर की मौत होने पर मातम नहीं मनाते, क्योंकि इनका रिवाज है कि मरने से उसे इस नर्क वाले जीवन से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया है। इस जीवन से उसे मुक्ति मिली है तो उसकी मौत पर जश्न मनाया जाता है और उसे नया जीवन मिला है। इनकी शव यात्रा और शादी दोनों ही बहुत नए प्रकार से होती है।
