गढ़वा के स्कूल में हाथ जोड़कर नहीं, हाथ बांधकर होती थी प्रार्थना
दया कर दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना..हे मालिक तेरे बंदे हम ये वो प्रार्थना है जो बचपन में हमनें स्कूल में हाथ जोड़कर रोज गाई है.. लेकिन जब इन प्रार्थनाओं के लिए कहा जाये कि आप इन्हें हाथ जोड़कर ही नहीं गा सकते या ये प्रार्थना गाना ही गलत है, तो आपको कैसा लगेगा कुछ ऐसा ही हुआ झारखंड के गढ़वा जिले में, यहां एक सरकारी स्कूल में ना सिर्फ दया कर दान विद्या का ये प्रार्थना गाने के लिए ही मना कर दिया गया बल्कि हाथ जोड़कर प्रार्थना करने पर भी मनाहीं कर दी गई..हद तो जब हो गई जब स्कूल के अध्यापकों ने नियम स्कूल में लागू भी कर दिया और 9 साल बीत जाने पर कानों-कान इसकी किसी को खबर ना हुई.पहले प्रार्थना चल रही थी … दया कर दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना… इसकी जगह गांव वालों के दबाव में गाया जाने लगा… तू ही राम है, तू ही रहीम है… आपत्ति तू ही राम है, तू ही रहीम है … पर नहीं है। होनी भी नहीं चाहिए। लेकिन पहली प्रार्थना पर आपत्ति क्यों? फिर हाथ जोड़ने में तो कोई बुराई होनी नहीं चाहिए!

दरअसल गढ़वा जिले के सरकारी स्कूल में अधिकतर बच्चे मुस्लिम समुदाय से आते हैं। गांव में भी 75% आबादी मुस्लिमों की ही है। गांव वालों ने इसे लेकर प्रिंसिपल योगेश राम पर दबाव बनाया प्रार्थना बदली जाये और इसे हाथ जोड़कर ना गाया जाए, ग्रामीणों की जिद के आगे वो स्कूल स्टॉफ मजबूर हुआ और पिछले 9 सालों से ये प्रार्थना का सिलसिला बदल गया।
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वहीं जब इस मामले पर विवाद खड़ा हुआ तो शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने जांच का आदेश दिया और कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूरे स्कूल के बच्चों को फिर से बुलाकर मुखिया के द्वारा समझाया गया कि प्रार्थना हाथ जोड़ कर ही करना है, हाथ बांधकर नहीं.

