गहलोत कुनबे में कलह, मंत्री और विधायकों की आपसी खींचतान से बढ़ी परेशानी
कांग्रेस मिशन 2023 की तैयारियों में जुटने की तैयारी कर रही है लेकिन सरकार के विधायक और मंत्री ही एक दूसरे की खिचाई करने में लगे हुए है। पहले पायलट और गहलोत की जंग से पार्टी दो गुटों में बटी हुई थी तो अब सरकार के मंत्री और विधायक ही एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। चुनाव से पहले विधायकों एवं कार्यकर्ताओं की ओर से लगातार किए जा रहे हमलों ने सीएम अशोक गहलोत के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।
सीएम ने इसके लिए इशारों ही इशारों में सचिन पायलट को इसका जिम्मेदार ठहराया था लेकिन गहलोत खेमे के मंत्री और विधायक ही सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं। भरत सिंह ने तो सरकार के खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को प्रदेश का सबसे बड़ा खान माफिया तक कह दिया है तो दूसरी तरफ अन्य विधायक भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
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रमेश मीणा और राजेंद्र गुढ़ा
सरपंचों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा के खिलाफ उनके मंत्री राज्यमंत्री राजेंद्र गुढ़ा बगावती तेवर दिखा रहे है।
बीडी कल्ला और लालचंद कटारिया
शिक्षा निदेशालय से हुए तबादलों को लेकर शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला पर कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के बीच जबरदस्त जंग देखने को मिली थी।

दिव्या मदेरणा और महेश जोशी
कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा ने पीएचईडी मंत्री डॉण् महेश जोशी पर आरोप लगाए थे। जोशी के बेटे के मामले में भी निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अमीन कागजी और परसादीलाल मीणा
डॉक्टरों के तबादलों से नाराज कागजी समर्थकों के साथ मंत्री के घर धरने पर बैठ गए थे और इसके बाद मंत्री ने सफाई देकर मामले को शांत करवाया।
अशोक चांदना विवादः अफसरों से नाराज होकर चंादना ने तो अपना इस्तिफा तक दे दिया था लेकिन इसके बाद सीएम ने मामले को लेकर उनकी नाराजगी दूर की।





