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जब भी छात्र सड़कों पर उतरा है तो पीएम से लेकर सीएम तक की सत्ता डोली है

प्रकाशित: Jan 28, 2022 17:18रिपोर्ट: Navtej TV

भारत दुनिया का ऐसा सबसे बड़ा देश है जहां सबसे ज्यादा युवा है और इसी वजह से सरकार बनाने और गिराने में युवाओं का सबसे बड़ा योगदान है। इन दिनों देश में युवा रोजगार के लिए सड़कों पर उतरकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। इन दिनों राजस्थान, यूपी, पंजाब और बिहार में छात्र परीक्षा में हुई धांधली को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे तो सरकार इन छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग कर रही है। लेकिन इन सरकारों को इतिहास का पता नहीं है कि जब छात्रों ने ऐसे आंदोलन किए है तो दिल्ली में बैठे पीएम को भी छात्रों के आगे झुकना पड़ा था और कई राज्यों में तो सरकार गिरने तक की नौबत आ गयी थी।

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बिहार में छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर कुछ जगहों पर हिंसक प्रदर्शन किया जिसके कारण उन पर एफआई दर्ज करने की नौबत आ गयी थी। यह मामाल अभी शांत होता नजर नहीं आ रहा है क्योंकि छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को तेज करने का प्रयास कर रहे है। बिहार का इतिहास इस बात की गंवाही देता है कि छात्रों ने जब भी सड़क पर उतरक प्रदर्शन किया है तो देश के पीएम नेहरू को भी उनसे बात करनें के लिए पटना आना पड़ा था।

बिहार में पहला छात्र आंदोलन 1955 में हुआ था और इस विवाद का कारण राज्य ट्रांसपोर्ट टिकट काटने को शुरू हुआ जो बाद में इतना उग्र हो गया था कि एक छात्र की जान चली गयी। जब आंदलोन कर रहे है छात्रों पर पुलिस ने गोली चलाई तो एक छात्र की मौत हो गयी और इसके बाद आंदोलन इतना उग्र हो गया था कि तात्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को पटना आना पड़ा और ट्रांसपोर्ट मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।

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आपतकाल के विरोध में छात्र आंदोलन के कारण लालू प्रसाद यादव और सुशील कुमार मोदी जैसे नेताओं की किस्मत बदल गयी। इस आंदोलन में नीतीश कुमार ने भी अपना योगदान दिया जो आज सीएम के पद पर है। इसके बाद इस आंदोलन की बागडोर जय प्रकाश नारायण ले जो आज भी बिहार में आज भी लोग उनको अपना आर्दश मानते है।


मंडल आयोग के विरोध में छात्र आंदोलन तो पूरे देश में गुंज उठा और वीपी सिंह सरकार ने 1990 में मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की घोषणा की थी। कोचिंग संस्थानों के खिलाफ छात्रों का आक्रोश भी बड़े आंदोलन में बदल गया। कोचिंग संचालकों को कानून के दायरे में लाने के लिए कानून बना लेकिन वह अभी तक लागू नहीं हो पाया है।

वहीं बात करें अन्य राज्यों की यूपी और राजस्थान में हालात इतने खराब हो गए है कि सभी भर्तियों के पेपर आउट हो जाते है और सरकार इन पेपर आउट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं कर पा रही है। राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने रीट भर्ती कराने को लेकर बड़ी वाहवाही लूटी लेकिन रीट का पेपर परीक्षा से 2 दिन पहले ही आउट हो गया इसके बाद भी सरकार कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रही है।