मुख्य समाचार पर जाएं
हिंदी समाचार · नवतेज टीवी
राजस्थान न्यूज़जयपुर की खबरसीकर समाचारआज राजस्थान में क्या हुआ?कोटा की खबर
नवतेज टीवी
☰ समाचार श्रेणियां
रेसिपी

बड़े उतार—चढ़ाव के बाद किसानों को मिली जीत, जानें एक साल के सफर की कहानी

प्रकाशित: Nov 19, 2021 12:22रिपोर्ट: Navtej TV
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु पर्व और कार्तिक पूर्णिमा के खास मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। इस एलान के बाद किसानों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और सभी किसानों ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है। इस आंदोलन की शुरूआत 17 सितंबर 2020 को तीन कृषि कानूनों का बिल पारित करने के साथ ही शुरू हो गयी थी और नवंबर के म​हीने में पंजाब और हरियाण के किसानों ने दिल्ली चलों के नारे के साथ आंदोलन करने का ऐलान कर दिया था जिसके बाद से इस आंदोलन में कई बड़े उतार चढ़ाव देखने को मिले।

कृषि कानूनों को वापस लेने का एक साल का सफर
1. कृषि कानूनों को निरस्त करों आंदोलन:
संसद में तीन नए कृषि कानूनों के पास होते ही किसान आंदोलन की रणनीति बननी शुरू हो गयी ​थी और 2020 नवंबर के पहले सप्ताह में पंजाब और हरियाणा के बड़े किसान संघों ने 'दिल्ली चलो' आंदोलन का नारा दिया। इसके बाद नवंबर के अंत में देश के कई राज्यों से किसान दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़े तो पुलिस और किसानों के मध्य झड़प हुई। गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत अपना पाड़त डाल दिया तो इस आंदोलन में धीरे—धीरे किसान बड़ी संख्या में पहुंचने लगे।
2. केंद्र सरकार और किसानों के मध्य वार्ता का दौर शुरू:
कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को मनाने के लिये और उनकी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत का दौर शुरू हो गया। केंद्र और किसानों के मध्य पहली बार 14 अक्टूबर, 2020 को वार्ता हुई लेकिन बात नहीं बनी इसके बाद 22 जनवरी 2021 को किसानों और सरकार के बीच 11वें दौर की वार्ता में भी बात नहीं बन सकी। किसानों ने आंदोलन खत्म करने की बजाय इसे व्यापक स्तर पर ले जाने की नई रणनीति बनाई।
3. 26 जनवरी को लाल किले पर हुआ हिंसक आंदोलन
कृषि कानूनों पर बातचीत के बीच ही किसान संगठनों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने की घोषणा कर दी। किसान संगठनों ने ट्रैक्टर रैली की इजाजत मांगी तो दिल्ली पुलिस ने आउटर रिंग रोड पर रैली निकालने की अनुमति दे दी। लेकिन रैली के दौरान कुछ आंदोलनकारी उग्र हो गए और दिल्ली के लालकिला, नांगलोई समेत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में उपद्रव मचा दिया। इस उपद्रव में लाल किले पर धार्मिक झंडा भी फहराया दिया गया जिसके बाद नया विवाद खड़ा हो गया। आंदोलन से जुड़े कई किसान संगठनों ने समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया तो लगा की आंदोलन जल्द खत्म हो जाएगा।
4. राकेश टिकैत के आंसूओं से मिला नया जोश26 जनवरी की हिंसा के बाद लगने आंदोलन खत्म होने की तरफ बढ़ने लगा तो भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के भावुक होने पर आंदोलन फिर से तेज हो गया। उसी रात बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने लगे और किसानों की संख्या बढ़ गयी।

5. सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामलाजब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच तो कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगाने का आदेश दिया और चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया। लेकिन बाद में कमेटी में शामिल हुए सदस्यों पर भी किसान नेताओं ने सवाल खड़े कर दिये।
6. विपक्षी दलों ने किसानों का साथ दियाकेंद्र सरकार ने जुलाई महीने में संसद का मॉनसून सत्र बुलाया तो पूरा विपक्ष सरकार पर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करता रहा। बीजेपी के सबसे पूराने सहयोग दल अकाली दल ने बीजेपी से अलग होने का फैसला किया तो कई दूसरे सहयोगी दलों ने भी कृषि बिलों पर एक बार फिर विचार करने की मांग रखी।
7.राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किया किसानों का समर्थन
बीजेपी के पूर्व दिग्गज नेता और वर्तमान में मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किसानों के आंदोलन का खुलकर समर्थन करना भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हुआ। मलिक ने कहा कि अगर किसानों की मांगों पर विचान नहीं किया गया तो केंद्र सरकार को हार का सामना करना पड़ेगा।