मोदी सरकार को झटका: अंग्रेजों के जमाने वाले देशद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
देशद्रोह को लेकर कई लोगों को जेल में डाला गया है और इसी वजह से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इस कानून पर रोक लगा दी है। इस कानून को लेकर मोदी सरकार पर कई सवाल खड़े हो रहे थे और इसी वजह से इस मोदी सरकार को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है।
लगभग 150 साल पहले अंग्रेजों के जमाने में बना देशद्रोह कानून को सुप्रीम कोर्ट ने गलत बताते हुए इस पर रोक लगाा दी है। कोर्ट ने कहा जब तक IPC की धारा 124-ए की री-एग्जामिन प्रोसेस पूरी नहीं हो जाती तब तक कोई मामला दर्ज नहीं होगा। इस कानून के तहत दर्ज पुराने मामलों में भी कार्रवाई पर रोक लगाने का फैसला किया है। जो लोग इस कानून के तहत जेल में बंद हैं वे जमानत के लिए अपील कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने जवाब पेश किया तो इसके बाद कोर्ट ने केंद्र को इस कानून के प्रावधानों पर फिर से विचार करने की अनुमति दी है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा 124ए पर रोक न लगाई जाए और पुलिस अधीक्षक की जांच के बाद FIR दर्ज की जाए।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत अन्य पक्षों की तरफ से देशद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिका दायर करते हुए कहा की आज के समय में इस कानून की जरूरत नहीं है। देशद्रोह कानून पर केंद्र सरकार ने पुनर्विचार करने का फैसला किया है। सरकार देशद्रोह कानून को खत्म नहीं करने पक्ष में है बल्कि इसमें बदलाव की मांग कर रही है। इस धाार में कई लोगों पर केस दर्ज है और इसमें जमानत का भी प्रावधान नहीं है।

गृह मंत्रालय के आकंड़ो के अनुसार पिछले 5 सालों में राजद्रोह के लगभग 300 से ज्यादा केस दर्ज किए गए है। इसमें से सबसे ज्यादा केस असम में दर्ज हुए है। नवनीत राणा, उमर खालिद,शरजील इमाम, हार्दिक पटेल और धर्मगुरू कालीचरण के साथ कई लोगों पर राजद्रोह के तहत केस हुआ है।





