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हिंदू पक्ष: कांग्रेस ने हिंदुओं के खिलाफ बनाया था वर्शिप एक्ट 1991, जल्द करें खत्म

प्रकाशित: May 19, 2022 17:14रिपोर्ट: Navtej TV

ज्ञानवापी मंदिर है या मस्जिद को लेकर पूरे देश में इसको लेकर चर्चा हो रही है। इस विवाद पर कोर्ट में लगातार सुनवाई हो रही है लेकिन सर्वे रिपोर्ट जमा नहीं हुई है लेकिन उससे पहले ही मंदिर में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है तो मुस्लिम पक्ष इससे इनकार कर रहा है। मुस्लिम पक्ष सर्वे को लेकर नाराज है और कह रहा है कि कोर्ट ने आदेश दिया है वह हमारे पक्ष में नहीं है जबकि वर्शिप एक्ट 1991 को नहीं माना जा रहा है।

मुस्लिम पक्षकार उसे एक्ट का हवाला दे रहे है जिसमें यह कहा गया है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट में 15 अगस्त 1947 के समय जो धार्मिक स्थल जिस स्थिति में थे वे वैसे ही बने रहेंगे अगर कोई मुकदमा करता है तो अदालत में खारिज हो जाएगा। इस एक्ट के अनुसार ही सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने का फैसला दिया था। यह एक्ट उस समय बनाया गया था जब राम ​मंदिर को लेकर आंदोलन चल रहा था और केंद्र सरकार को डर लग रहा था कि मंदिर को लेकर भविष्य में विवाद होगा तो उन्होंने यक एक्ट बना दिया।

जब अयोध्या में राम मंदिर को लेकर आंदोलन तेज हो रहा था उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और उसने मंदिर—मस्जिद विवाद को बढ़ता देख 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने पूजा स्थल कानून बना दिया। इस कानून के मुताबिक 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकेगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसे एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना भी देना होगा। जब कानून बना तब अयोध्या का मामला कोर्ट में था इसलिए उसे कानून से अलग रखा था।

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जब ये कानून बना तब भाजपा ने इसका विरोध किया था और उस वक्त राज्यसभा में अरुण जेटली और लोकसभा में उमा भारती ने एक्ट को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की थी। लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया जिसको लेकर बीजेपी ने जमकर विरोध किया। इस एक्ट के कारण हिंदू पक्ष के लोग नाराज है कि उन्होंने कहा यह कानून केवल हिंदू धर्म के खिलाफ बना है। हिंदू पक्षकार कहते है कि अगर यह एक्ट ऐसे ही बना रहा तो हम न्याय के लिए किस के पास जाएंगे। यह एक्ट एक धर्म विशेष पर पाबंदी लगा रहा है और इसके कारण उस धर्म के लोगो में आक्रोश बढ़ रहा है।


जैसे अयोध्या का केस राम लला विराजमान के नाम से था वैसे ही मथुरा में कृष्ण विराजमान और काशी में शिव विराजमान हैं। जब राम को अधिकार मिला तो शिव और कृष्णा को भी मिलना चाहिए। मस्जिद का निर्माण ऐसी जगह पर नहीं होना चाहिए जहां मंदिर है लेकिन ज्ञानवापी ऐसा हो रहा है तो इस्लाम जब इसकी इज्जात नहीं देता को कानून को इस पर विचार करके हिंदुओं की आस्था वाली जगह पर अधिकार देना चाहिए। अयोध्या के बाद काशी और मथुरा की आने वाले समय में सभी लोगों के सामने सच्चाई आएगी।