चिदंबरम के बने कानून में फंस गए राहुल-सोनिया, ED के आगे सब फेल
इन दिनों देश में सब लोगों के लिए ED चर्चा का विषय बना हुआ है और इसके कारण आज कांग्रेस के नेता सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि पैसों की हेराफेरी के कारण कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रिय अध्यक्ष राहुल गांधी से ED लगातार दो दिनों से पुछताछ कर रही है। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि ED देश की सबसे शक्तिशाली एजेंसी कैसे बन गई।
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बताया जाता है कि साल 2000 में देश में ब्लैक मनी का कारोबार अपने पांव पसारने लगा तो मौजुदा अटल सरकार ने इसको रोकने के लिए एक कानून लेकर आई। लेकिन इसके बाद सत्ता परिर्वतन हो गई और कांग्रेस की सरकार बनी तो साल 2005 में मनमोहन सरकार के वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने इस कानून को इतना धारदार बनाकर लागू कर दिया।
इसके बाद ED की ताकत बढ़ती गई और मनी लॉन्ड्रिंग कानून यानी दो नंबर के पैसे को हेरफेर से ठिकाने लगाने वालों के खिलाफ यह जांच करती है। लेकिन कांग्रेस को इस बात का पता नहीं था कि उनका बना यह कानून उनके लिए ही परेशानी खड़ी करेगा। केंद्र सरकार की अकेली जांच एजेंसी ED है, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में नेताओं और अफसरों को तलब करने के लिए सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं है। ED छापा मारने के साथ वह प्रॉपर्टी भी जब्त कर सकती है। ED की रडार पर कांग्रेस के बड़े नेता है और इसको लेकर विपक्ष बीजेपी पर बदले की भावना का आरोप लगा रहा है।

नेशनल हेराल्ड मामला : सोनिया और राहुल गांधी,पंचकुला लैंड केस: भूपिंदर सिंह हुड्डा,आय से अधिक संपत्ति: डीके शिवकुमार,INX मीडिया: पी चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम,जमीन खरीद घोटाला: रॉबर्ट वाड्रास्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी: फैसल पटेल,अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत,सुरेश कलमाडी कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला

