विपक्ष की कमान को लेकर ममता और सोनिया में तेज हुई जंग!
मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए पूरा विपक्ष एकजूट होने का दावा करता है लेकिन जब भी विपक्ष के नेता की बात आती है तो कई चेहरे सामने आते है। पिछले कुछ समय से कांग्रेस व टीएमसी में विपक्ष को लेकर जो खींचतान चल रही है उसे देखकर एक बात तो साफ हो गयी है कि विपक्ष एकजूट नहीं है और कांग्रेस को विपक्ष का नेता बनने के लिए भी अन्य दलों की जरूरत पड़ रही है। 2014 के बाद से कांग्रेस का जनाधर बहुत कम हो गया है और कई राज्यों में तो उसका खाता भी नहीं खुल पा रहा है ऐसे में ममता बनर्जी कांग्रेस को विपक्ष का नेता मानने के पक्ष में नहीं है।
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ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के बिना तीसरे मोर्च की तैयारी में जुटी हुई है और दिल्ली में कई नेताओं से मुलाकत करने के बाद मुंबई में भी शिवसेना और एनसीपी से बात की लेकिन वहां ममता की दाल नहीं गली। ममता ने कहां की कांग्रेस के बिना भी मोदी सरकार से लड़ा जा सकता है लेकिन शिवसेना ने इस बात को गलत बताया और कहा कि कांग्रेस के बिना विपक्ष नहीं बन सकता। ममता ने कहा था कि यूपीए जैसा कुछ नहीं है इसके बाद कांग्रेस ने ममता को जवाब देत हुए कहा कि वह तो पहले ही यूपीए से बाहर है उनको क्या पता यूपीए है या नहीं।

कांग्रेस छोड़कर ममता की पार्टी में जाने के लिए नेताओं में जबरदस्त होड़ मची हुई है और कांग्रेस को इसी बात का डर सता रहा है कि कई ममता उनसे विपक्ष की भूमिका भी नहीं छीन लें। इसी वजह से दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर विपक्षी नेताओं की बैठक की गयी है। इस बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना सांसद संजय राउत, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला, डीएमके नेता टीआर बालू और लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी जैसे नेता शामिल हुए है। लेकिन समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, आरजेडी और बहुजन समाज पार्टी जैसे बड़े दलों के साथ टीएमसी नेताओं का न होना भी सवाल खड़े कर रहा है।
कांग्रेस को लेकर उनके ही नेता सवाल उठाते रहे है और इस बार तो ममता ने अपना मोर्चा तैयार कर लिया है कि वह यूपीए से हटकर तीसरा विकल्प बनाएगी। ममता और सोनिया की लड़ाई से विपक्ष एकजूट होने का दावा भी गलत साबित होता है और अब यह देखना होगा कि क्या भविष्य में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका से भी गायब हो जाएगी। मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए पूरा विपक्ष एक होने का दावा करता है लेकिन विपक्ष का नेता कौन बनेगा इस पर किसी की राय एक नहीं है। कांग्रेस सोनिया पर तो टीएमसी ममता पर और एनसीपी पवार को नेता बताती है।

सोनिया से बैठक के बाद सभी ने कहा कि हमारा मुख्य एजेंडा विपक्षी एकता को लेकर था और राज्यों के हिसाब से यह तय किया जाएगा।
2024 में भाजपा का मुकाबल करने के लिए विपक्ष कैसे एक होकर आगे बढ़ता है और विपक्ष की कमान किस के हाथ में होगी वह भी रोचक होगा। ममता किसी भी हालत में कांग्रेस से समझौता करने के लिए तैयार नहीं है और तीसरे विकल्प का सपना कैसे और कब तक पूरा होगा यह देखना दिलचस्प होगा।





