ताजमहल: मोहब्बत की निशानी के चक्कर में 5 गांवों में तैयार हो गई कुंवारों की फौज
दुनिया की सातवें अजूबे में शुमार ताजमहल इन दिनों चर्चाओं में बना हुआ है, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर कर ताजमहल के 22 कमरे खुलवाने की माँग की गई है, वैसे तो ताजमहल पूरी दुनिया में मोहब्बत की निशानी माना जाता है पूरी दुनिया में इस संगमरमर की इमारत की खूबसूरती की तारीफ की जाती है लेकिन इसके आसपास बसे 5 गांवों के लोग इसे अभिशाप से कम नहीं मानते, इसकी वजह से इन गांवों के लड़कों की शादी ने हो पा रही है, तो क्या है कारण है ताजमहल को अभिशाप मनाने के पीछे और क्यों नहीं हो रही है इसकी वजह से कुवारों की शादियां देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
वैसे तो ताजमहल पूरी दुनिया में भले ही उसकी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रेम के इस स्मारक के इर्दगिर्द बसे पांच गांवों के ताजमहल को उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में पैदा हुयी दुश्वारियों के कारण इसे कोसने को मजबूर हैं। ताजमहल को कोसने के लिये अभिशप्त ये गांव हैं गढ़ी बंगस, नगला पैमा, तल्फ़ी नगला, अहमद बुखारी और नगला ढींग, जिनका रास्ता ताजमहल के बगल से गुजरता है।
इन गांव वालों की मुसीबत 1992 से बढ़ गई। तब उच्चतम न्यायालय ने ताजमहल को अपनी निगरानी में ले लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ताजमहल की सिक्योरिटी बेहद चाक-चौबंद कर दी गई। सुरक्षा की दृष्टि से इन गांवों की ओर जाने वाले व्यक्ति को प्रशासन से 'पास' लेने की जरूरत होती है। गांव के लोगों के 'पास' पहले से बने हुए हैं, लेकिन उनके रिश्तेदारों को गांव में आने के लिये हर बार नया पास बनवाना होता है।
ताजमहल से इन गांवों की ओर जाने वाले रास्ते पर 'चेक प्वाइंट' बने हैं। जिसके घर पनर कोई रिश्तेदार आता है उसे यहां बुलाया जाता है। इसके बाद ही उन्हें गांव में प्रवेश करने की अनुमति मिलती है। किसी भी मांगलिक कार्यक्रम में इन गांव वालों के रिलेटिव्स नहीं पहुंच पाते हैं। यही नहीं, शादी-विवाह के कार्ड देने और युवाओं के रिश्ते के लिए भी लोग यहां पहुंच नहीं पा रहे।

ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाये जाने से ग्रामीणों की दुश्वारियां इस कदर बढ़ गयी हैं कि इन गांवों में रहने वालों के घर पर ना तो रिश्तेदार आ पाते हैं, ना ही रिश्ते की बात करने वाले इन पांच गांवों तक पहुंच पाते हैं। नतीजा, इन गांवों के 40 प्रतिशत युवा कुंवारे रह गये हैं और उनके लिए शादी के रिश्ते भी नहीं आ पा रहे हैं। इसलिए ताजमहल को कोसने के लिये अभिशप्त इन गावों के लोग।
बीते तीन दशक से ऐसे हालात से 2-4 हो रहे इन गांवों के लोग कोसते हुए यही कहने को मजबूर हैं कि “काश! ये ताजमहल जैसी इमारत हमारे आस-पास नहीं होती।” अब स्थिति तो यह भी आ गयी है कि इस समस्या से आजिज आ चुके इन गांवों के कुछ लोग पलायन भी करने लगे हैं, वहीं अब ताजमहल को लेकर विवाद के बीच इन गांवों के लोगों की भी उम्मीद जगी कि शायद उनकी समस्याओं का भी कोई हल हो जाए।





