ताज के 22 कमरों का राज अब नहीं आएगा बाहर,मंदिर या मकबरे पर रहेगा विवाद
मोहब्बत की निशानी ताजमहल को लेकर खड़ा हुआ विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, ताजमहल के अंदर 22 कमरों को खोलने की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज किया तो याचिककर्ता के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने कहा है कि वो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे, तो क्या अब 22 कमरों का राज कभी सामने नहीं आ पाएगा, तो क्या अब ये कभी पत्ता नहीं चल पायेगा, कि इन 22 कमरों के पीछे शिव मंदिर है या मकबरा।
मंदिर या मकबरा ताज के 22 कमरों के पीछे क्या? नहीं जानेंगी अब दुनिया?
ताज के बंद दरवाजों को खोलने में एक नहीं कई अड़चनें हैं। पहली, वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा रखने वाली इमारत से छेड़छाड़ के लिए चाहिए होंगे करोड़ों रुपए और हाईलेवल एक्सपर्सट्स की कई टीमें। दूसरी वजह यह भी है कि ताजमहल वर्ल्ड हैरीटेज मॉन्यूमेंट है, इसलिए UNESCO भी इस मामले में दखल देगा।ताजमहल के 22 कमरे कई दशकों से बंद हैं। इतिहासविदों के अनुसार कहा जाता है कि मुख्य मकबरे और चमेली फर्श के नीचे 22 कमरे हैं, जो अभी तक बंद हैं। ये कमरे मुगल काल से बंद हैं। इन कमरों को आखिरी बार 1934 के समय खोला गया था। उस दौरान इन्हें केवल निरीक्षण के लिए खोला गया था। इसके बाद इन्हें बंद कर दिया गया।
ताजमहल फर्श पर यमुना की और बनी दो सीढ़ियां हैं, जिनके ऊपर लोहे का जाल बिछाया हुआ है।ताजमहल की संगमरमर की संरचना की पहली मंजिल पर कमरे हैं। इस ऊपरी मंजिल की ओर जाने वाली 2 सीढिया शाहजहां के समय से ही बंद हैं। ऊपरी मंजिल पर इन कमरों के फर्श और संगमरमर की दीवारों को देखा जा सकता है। कई ऐसे इतिहासकार हैं, जिनका कहना है कि ताजमहल के बेसमेंट में जो कमरे बने हुए हैं, वे मार्बल के बने हैं। ऐसा कहते हैं कि तहखाने में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा अगर बढ़ती है, तो वो कैल्शियम कार्बोनेट में बदल सकती है। कार्बन डाइऑक्साइड मार्बल्स को पाउडर का रूप देना शुरू कर देते हैं और इसकी वजह से दीवारों को नुकसान पहुंच सकता है।

ताजमहल की दीवारों को नुकसान से बचाने के लिए यहां के तहखानों को बंद कर दिया गया है। इन सब कारणों की वजह से इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 22 कमरों को खोलने वाली याचिका को खारिज किया और याचिकाकर्त्ता को तल्ख लहजे में कहा कि ताज महल के कमरों को खोलने वाले आप कौन हैं? अदालत ने जनहित याचिका की व्यवस्था का दुरुपयोग न करने की बात कही। अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस याचिका पर सुनवाई से मना कर देता है तो यह सिर्फ एक राज ही रह जाएगा कि ताजमहल के उन 22 कमरों में क्या है जिन्हें दुनिया जानना चाहती है और इन कमरों में शिव मंदिर या मकबरा भी है या नहीं अब ये भी शायद पत्ता नहीं चल पाएगा।





