इस शख्स को बनाया जाएगा पीएम मोदी का उत्तराधिकारी, जानें पूरा सच!
2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पीएम मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर भी एक चर्चा शुरू हो गई। दरअसल पीएम ने मार्गदर्शक मंडल बनाया है और 2024 के बाद अगले चुनाव में वो भी उसी श्रेणी में आ जाएंगे जिसकी वजह से कई कद्दावर नेता एक्टिव पॉलिटिक्स से बाहर हुए जैसे आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी।
पीएम मोदी का उत्तराधिकारी कौन?,VIDEO
पीएम मोदी के सबसे करीबी अमित शाह ही हैं और वर्तमान सरकार में भी वो दूसरे महत्वपूर्ण पद पर हैं, अब यूपी की ऐतहासिक जीत के बाद सीएम योगी को भी प्रधानमंत्री के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है, इसकी भी चर्चा लगातार जोरों पर है, शाह और योगी तो दौड़ में है ही लेकिन फिर एक चेहरे ने इस दौड़ में खुद को खड़ा कर लिया है वो नाम है नीतिन गडकरी, लेकिन जनता ने गडकरी को प्रधानमंत्री के उत्तराधिकारी के तौर पर ना देखकर प्रतिद्वदी के तौर पर ज्यादा देखा है, लेकिन अब हम जिस चेहरे की बात कर रहे है उसे जनता ने कभी पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर नहीं वो नाम है विदेश मंत्री एस जयशंकर, एस जयशंकर की पहचान भी एक तेज़-तर्रार डिप्लोमैट की रही है।
नरेंद्र मोदी जब 2014 में प्रधानमंत्री चुने गए तो एस जयशंकर अमेरिका में भारत के राजदूत थे, सितंबर 2014 में जब पीएम मोदी ने अमेरिका का दौर किया तो उस समय जयशंकर ही अमेरिका में भारत के राजदूत थे, कहा जाता है कि जयशंकर ने जिस तरह से मोदी के दौरे की प्लानिंग की थी, उससे वह काफ़ी प्रभावित थे, सितंबर 2020 में जयशंकर की किताब 'द इंडिया वे' आई थी. इस किताब में कहा गया है कि तीन चीज़ों ने भारत की विदेश नीति को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, पहला देश का विभाजन, दूसरा 1991 के आर्थिक सुधार में देरी हुई और तीसरा कारण भारत ने परमाणु हथियार चुनने के मामले में देरी, जयशंकर के पिता के सुब्रमण्यम को कई प्रधानमंत्री उनकी विशेषज्ञता को तवज्जो देते थे. इनमें राजीव गांधी, आईके गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर मनमोहन सिंह तक शामिल हैं।

ये सभी प्रधानमंत्री विचारधारा के स्तर पर भी अलग-अलग सोचते थे, लेकिन जयशंकर के बारे में कहा जाता है कि वह भले तेज़ तर्रार डिप्लोमैट के रूप में जाने जाते हैं लेकिन मोदी सरकार की सही आलोचनाओं को भी वह सकारात्मक रूप में नहीं लेते हैं, अब एस जयशंकर की लोकप्रियता इतना बढ़ गई है कि उन्हें पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है, ब्यूरोंक्रेट के अनुभव की वजह से ही मनमोहन सिंह एक अच्छे पीएम बन पाए, वहीं विदेश मंत्री के तौर पर अनुभव की वजह से ही अटल बिहारी वाजपेयी भी एक अच्छे प्रधानमंत्री साबित हुए, वहीं अगर एस जयशंकर की बात करे तो रूस, चीन और अमेरिका जैसी ताकतों से निपटने के लिए एस जयशंकर एक शानदार चयन है और इसलिए पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में एस जयशंकर एक बेहतरीन विकल्प इसमें कोई संदेह नहीं है।





