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यूपी चुनाव तय करेगा इन पार्टियों का राजनीतिक भविष्य

प्रकाशित: Nov 03, 2021 11:13रिपोर्ट: Navtej TV
देश के किसी भी राज्य में होने वाले चुनाव अपने राज्य तक ही समीति रहते है लेकिन यूपी के चुनाव के नतीजे देश की राजधानी तक अपना प्रभाव डालते है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर किसी को दिल्ली पर राज करना है तो उसे पहले यूपी को फतह करना होगा क्योंकि यूपी में लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटे आती है। दिल्ली पर किसी भी पार्टी का शासन रहा हो या प्राप्त करना हो तो बिना यूपी जीते वह अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सकता। पिछले चुनावों के नतीजों की बात करें तो यूपी में बीजेपी की प्रचंड जीत से कई पार्टियों का राजनीतिक भविष्य दाव पर लग गया।

अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रिय पार्टीया अपना वजूद बचाने के लिए गठबंधन करने में लगी हुई है। यूपी में बीजेपी की जबरदस्त जीत ने सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी और बसपा के लिए परेशानी खडी की है क्योंकि इन दोनों पार्टियां का यूपी में बहुत अच्छा वोट बैंक माना जाता था।

कांग्रेस: देश की सबसे पुरानी पार्टी को यूपी में सत्ता हासिल किये कई दशक बीत चुके है और पिछले चुनावों में महागठबंधन करके अपना वोट बैंक मजबूत करने का प्रयास किया, लेकिन वह प्रयास जनता ने सिरे से नकार दिया और चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस ने यूपी में अपना खोया हुआ वजूद पाने के लिए प्रियंका को चूनावी मैदान में उतारा है। कांग्रेस इस बात को जानती है कि बिना यूपी के दिल्ली में सरकार बनाना आसान नहीं है और इसी वजह से प्रियंका के चेहरे के साथ यूपी जीतने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रियंका ने महिला वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए जो बड़ी—बड़ी घोषणाएं की है उनका कितना असर होगा यह तो चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा लेकिन इस बार कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है पर पाने को बहुत कुछ है।
समाजवादी पार्टी: यूपी में अगर सबसे ज्यादा किसी पार्टी को नुकसान हुआ है तो वह सपा है क्योंकि चाचा—भतीजे की लड़ाई में सत्ता तो हाथ से गयी और जो वोट बैंक था वो भी हाथ से निकल गया। सपा का यूपी के बाहर ज्यादा प्रभाव नहीं है और वह यूपी की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों में गिनी जाती है लेकिन पिछले चुनावों के परिणाम को देखे तो सपा का राजनीतिक भविष्य थोड़ा धुंधला नजर होता दिख रहा है। आने वाले चुनावों में सपा प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं रहता है तो उसका राजनीतिक भविष्य भी खत्म होने की कगार पर जा खड़ा होगा।

बसपा: यूपी में बसपा का प्रदर्शन जैसा देखने को मिल रहा है उससे अच्छा प्रदर्शन तो दूसरे राज्यों में देखने को मिल जाता है।बसपा को यूपी में अपना वजूद बचाने के लिए कुछ नया प्रयोग करना होगा क्योंकि यूपी की जनता अब जाति के नाम पर वोट नहीं देती है। इस बार मायावती के चुनावी भाषणों में अपने पुराने वोट बैंक कहे जाने वाले ब्राह्मण वोट को जमकर याद कर रही है।