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इस कारण मुस्लिम कर रहे यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध

प्रकाशित: May 31, 2022 17:08रिपोर्ट: Navtej TV

Uniform Civil Code का अर्थ है सभी नागरिकों के लिए एक कानून, इसका किसी भी समुदाय से कोई संबंध नहीं है। इस कोड के तहत राज्य में निवास करने वाले लोगो के लिए एक समान कानून का प्रावधान किया गया है, यानी की धर्म के आधार पर किसी भी नागरिक को विशेष लाभ नहीं मिलेगा।

अभी तक अलग-अलग राज्यों के अलावा केंद्र सरकार की ओर से भी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के विषय में चर्चा की गयी है लेकिन अभी तक भी इस मुद्दे में कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। भारत में अभी सिर्फ एक राज्य है जहाँ यूनिफार्म सिविल कोड लागू है वह राज्य है गोवा। यूनिफार्म सिविल कोड के अगर फायदों की बात करें तो इसके लागू होने से सभी समुदाय के लोगो को एक समान अधिकार दिए जायेंगे।

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समान नागरिक सहिंता लागू होने से भारत की महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा। कुछ समुदाय के पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकार सिमित है। ऐसे में यदि Uniform Civil Code लागू होता है तो महिलाओं को भी समान अधिकार लेने का लाभ मिलेगा। महिलाओं का अपने पिता की सम्पति पर अधिकार और गोद लेने से संबंधी सभी मामलों में एक सामान नियम लागू हो जायेंगे।

भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने समान नागरिक सहिंता लागू कानून लागू करने का मुद्दा उठाते हुए कहा था, आज़ादी के 75 साल बाद देश में संविधान का ऑरटीकल 44 यानि समान नागरिक संहिता लागू होना चाहिए। वहीं उत्तराखंड सरकार ने इस मुद्दे पर ठोस कदम आगे बढ़ा दिया है। इस तरह से उत्तराखंड समान नागरिक संहिता की दिशा में काम करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उत्तराखंड की पुष्कर धामी सरकार इसको लागू करने के लिए ड्राफ्टिंग कमेटी गठित कर दी है।


समान नागरिक संहिता पर एक तरफ सरकारों के स्तर पर हलचल देखी जा रही है तो मुस्लिम समुदाय में इसका विरोध भी तेज हो गया है। उनको लगता है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड उनके धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है। जबकि इसमें महिला और पुरुषों को समान अधिकार की बात है। इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। कुछ संगठन यह कहकर लोगों को बरगलाते हैं कि इसे सब पर थोप दिया जाएगा। ऐसे में सरकार अगर समान नागरिक संहिता की तरफ बढ़ती है तो उसे पहले सबका भरोसा जीतना होगा और सबसे पहले एक ड्राफ्ट सामने रखना होगा जिस पर घर से लेकर संसद में चर्चा हो सके।

तीन तलाक को भारत में वैसे तो प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन अब भी मुस्लिम 4 शादियां कर सकते है, हिंदुओं और कई जनजातियों में भी ऐसी प्रथाएं हैं, जिन पर काफी विवाद हो रहा है, अगर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है तो ये सारे मुद्दे सुलझ जाएंगे।