बंगाल हिंसा: जान बचाने के लिए बीरभूम से पलायन शुरू, जानें हिंसा का पूरा सच
पश्चिम बंगाल इन दिनों हिंसा की आग में झुलस रहा है और इस वजह से ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल खड़े हो रहे है कि लोगों की रक्षा करने में वह फेल हुई है। पिछले दिनों बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस नेता भादू शेख की हत्या के बाद फैली हिंसा में आठ लोगों को जिंदा जलाने के बाद पूरे इलाके में तनाव बना हुआ है। हिंसा के डर से लोग घरों को छोड़कर दूसरी जगह पलायन कर रहे हैं और लोगों के मन में डर है कि कहीं दोबारा ऐसी घटना हुई तो उन्हें भी जिंदा जला दिया जाएगा।
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बीजेपी ने बीरभूम में हुई इस घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से पूरी रिपोर्ट मांगी है। बीजेपी ने इस घटना पर एक 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो हिंसा वाले क्षेत्र का दौरा करेगी और जांच रिपोर्ट जेपी नड्डा को सौंपेगी।

हत्या के बाद हुई हिंसा में जिंदा जलकर मरे लोगों के लिए गवर्नर जगदीप धनखड़ ने दुख जताया है और कहा है कि राज्य हिंसा की संस्कृति और जंगलराज के हवाले है। मेरी संवेदनाएं पीड़ितों के परिवारों के साथ हैं। ममता बनर्जी ने राज्यपाल से कहा है कि वह ऐसे बयान ना दें जिससे दूसरे दलों को सरकार को धमकाने के लिए समर्थन मिले।
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अधीर रंजन चौधरी ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से पश्चिम बंगाल में अनुच्छेद 355 को लागू करने की बात कही है। बीरभूम की इस घटना पर वह राष्ट्रपति से मिलकर पूरी जानकारी दुंगा और 355 लगाने का सुझाव दूंगा। बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत ही खराब हो रही है। बंगाल में इस प्रकार की हिंसा होना बड़ी बात नहीं है लेकिन खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि इस हत्या में टीएमसी के कार्यकता ही शामिल है।





