जो गिफ्ट इंदिरा गांधी ने श्रीलंका को दिया था, क्या वापस ले पाएंगे PM मोदी!
कहते है सरकारों के द्वारा लिए गए फैसले आपके अतीत के लिए घातक हो सकते है और भारत बड़ा भुग्तभोगी है ऐसा ही फैसला भारत के लिए परेशानी की एक वजह बना है, ये फैसला लिया था पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, इंदिरा गांधी के उस फैसले के सुधार की अब मांग उठने लगी है भारत के दक्षिणी छोर और श्रीलंका के बीच यह एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा है लेकिन इसकी अहमियत बड़ी है, इसे कच्चातीवु द्वीप कहते हैं, जिसे भारत ने श्रीलंका को दे दिया था। नतीजा यह हुआ कि भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों का मुद्दा बढ़ता गया।

श्रीलंका और भारत के रामेश्वरम के बीच यह कच्चातीवु द्वीप है। पारंपरिक रूप से श्रीलंका के तमिलों और तमिलनाडु के मछुआरे इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। हालांकि भारत ने 1974 में एक सशर्त समझौते के तहत यह द्वीप श्रीलंका को दे दिया। 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने श्री लंका की राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए और कच्चातीवु श्रीलंका का हो गया।
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समझौते का मकसद संसाधन प्रबंधन और कानून प्रवर्तन में सुविधा देना था, अब भारतीय मछुआरों को केवल यह अनुमति थी कि वे आराम करने, नेट को सुखाने और सालाना सेंट एंथोनी फेस्टिवल के लिए आ सकते थे। उन्हें इस द्वीप पर मछली पकड़ने की अनुमति नहीं थी। कुछ दशक ठीक रहा लेकिन समस्या तब गंभीर होने लगी जब भारतीय उपमहाद्वीप क्षेत्र में मछली और जलीय जीवन कम होने लगा। भारतीय मछुआरे आगे बढ़ने लगे। दरअसल, अब मछली पकड़ने के लिए आधुनिक ट्रॉलियों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हो रहा है।
पिछले दिनों संसद में कच्चातीवु द्वीप श्रीलंका को सशर्त देने से भारतीय मछुआरों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठा। AIADMK के एक सांसद ने मांग की कि सरकार 1974 में हुए समझौते को रद्द कर यह द्वीप वापस ले। क्योकि आए दिन श्रीलंका की नौसेना अपने जल क्षेत्र में मछली पकड़ने का आरोप लगाते हुए तमिलनाडु के मछुआरों को पकड़ लेती है, उनके साथ मार-पीट करती है और उनकी नौकाएं जब्त कर लेती है। विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार भारत और श्रीलंका के बीच 1974 और 1976 के बीच किए गए समझौते के तहत यह द्वीप श्रीलंका के हिस्से में पड़ता है। मामला अभी भारत के सुप्रीम कोर्ट में है। 2014 में मामला मद्रास हाई कोर्ट में गया था। इस पर तत्कालीन सीएम जयललिता ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फैसले पर पुनर्विचार करने की बात कही थी।
अब एक बार फिर मामला उठने से बातें होने लगीं हैं कि जिस द्वीप को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने श्रीलंका को गिफ्ट किया था, क्या अपने मछुआरों के हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वापस लेंगे? इस समय श्रीलंका को आर्थिक संकट से निकालने के लिए सबसे ज्यादा मदद अगर किसी देश ने की है तो वह भारत ही है। ऐसे में भारत को चाहिए कि श्रीलंका की इस स्थिति को देखते हुए उस पर कच्चातीवु द्वीप को लौटाने के लिए दबाव बनाये.





