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कुछ ऐसी थी द्रौपदी मुर्मू की लव स्टोरी, दहेज में मिली थी ये चीजें जानकर रह जाएंगे हैरान!

प्रकाशित: Jul 22, 2022 15:24रिपोर्ट: Navtej TV

आज देश को अपना 15वां राष्ट्रपति मिला है, एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर जीत दर्ज की है, वैसे एनडीए की तरह से जब द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था तभी से उनकी जीत तय मानी जा रही थी, द्रौपदी मुर्मू के रूप में देश को पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति मिली है, द्रौपदी मुर्मू का एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होना बड़ा संघर्षों भरा है, मुर्मू की प्रेम कहानी की अगर बात करें तो वो भी कुछ अलग ही है.


द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून, 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था, वो आदिवासी संथाल परिवार से आती हैं। द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। उनके तीन बच्चे हुए जिसमें से 2 बेटों की मौत हो चुकी है अब सिर्फ उनकी एक बेटी है।

जिस घर में दुल्हन बनकर आई थी Murmu उसे ही बना दिया School!

द्रौपदी मुर्मू जब ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के रामादेवी वुमन कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही थी तब उनकी मुलाकात श्याम चरण मुर्मू से हुई, श्याम चरण भी भुवनेश्वर के एक कॉलेज से पढ़ाई कर रहे थे। धीरे-धीरे दोनों की जान-पहचान प्यार में बदल गई, श्याम चरण मुर्मू द्रौपदी से शादी करना चाहते थे, इसलिए वो वो शादी का प्रस्ताव लेकर द्रौपदी के घर पहुंच गए। शुरुआत में द्रौपदी के पिता बिंची नारायण टुडू श्याम से अपनी बेटी की शादी करने को तैयार हुए लेकिन श्याम अपने रिश्तेदारों के साथ ही द्रौपदी के गांव उपरबेड़ा में डेरा डाल कर बैठ गए। तो मुर्मू द्रौपदी अपने लिए इतना प्रेम देखकर श्याम चरण से शादी का फैसला लिया और अपने घरवालों से कहा कि वो शादी करेगी तो सिर्फ श्याम चरण से, बेटी की जिद के आगे घरवाले भी हार गए और उन्होंने द्रौपदी की शादी श्याम चरण से कराने का फैसला किया, मुर्मू को उनके पिता ने दहेज में शादी में एक बैल, एक गाय और 16 जोड़ी कपड़े भी दिए, इसके बाद द्रौपदी पहाड़पुर गांव की बहू बन गईं, द्रौपदी और श्याम के दो बेटे और एक बेटी पैदा हुए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था, 2010 में उनके पहले बेटे और 2013 में उनके दूसरे बेटे की मौत हो गई। इसके बाद अगले ही साल 2014 में उनके पति भी इस दुनिया को अलविदा कह गए। दो जवान बेटों और पति की मौत से आहत द्रौपदी ने अपने पहाड़पुर वाले घर को स्कूल में बदल दिया। अब यहां बच्चे पढ़ाई करते हैं। द्रौपदी यहां अपने बच्चों और पति की पुण्यतिथि पर जाती हैं.