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पंजाब में 'गुरु' के आगे फिर झुकी कांग्रेस, जानें इसकी पूरी वजह

प्रकाशित: Nov 10, 2021 16:10रिपोर्ट: Navtej TV
अगले साल होने पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में जबरदस्त ड्रामा देखने को मिल रहा है। कैप्टन के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने दलीत चेहरे पर कार्ड खेला और चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बना दिया लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अध्यक्ष पद छोड़ने की धमकी दे डाली। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने जैसे तैसे करके सिद्धू को मना तो लिया लेकिन वह सीएम चन्नी के फैसलों पर खुलकर विरोध कर रहे हैं। सिद्धू ने राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल एपीएस देओल और डीजीपी सहोटा के इस्तीफे को एक राजनीतिक मुद्दा बना चुके है। सिद्धू ने बगावती तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि सरकार या तो उन्हें चुन ले या फिर इन दोनों अफसरों को।

सरकारी नियुक्तियों को लेकर सिद्धू और सीएम चन्नी के बीच जबरदस्त तनातनी चल रही है और हर बार कांग्रेस आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। पंजाब की राजनीति में कांग्रेस के लिए सिद्धू ऐसी मुसीबत बन गये है कि वह कब क्या कर दें इसको लेकर चिंता लगी रहती है। सिद्धू की अगर जरा सी बात नहीं मानी जाती तो वह सीधे पार्टी पर हमला करते है और पार्टी छोड़ने की धमकी देते हैं।

पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी के साथ मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तालमेल बैठाना होगा क्योंकि 2022 में विधानसभा चुनाव होंगे। राजनीति के जानकारों की माने तो पंजाब में सिद्धू के पास विधायक की संख्या ज्यादा है और इसी वजह से उनकी हर बात मानी जा रही है। अगर वह सिद्धू की बात नहीं मानती है तो वह पार्टी छोड़ सकते हैं जिसका नुकसान कांग्रेस को उठाना होगा क्योंकि कांग्रेस पहले कैप्टन को खो चुकी है।